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Brown Sugar vs White Sugar: ब्राउन शुगर को अक्सर व्हाइट शुगर से ज्यादा हेल्दी माना जाता है, लेकिन फ्रेंच बायोकेमिस्ट जेसी इनचॉस्पे का कहना है कि दोनों शुगर में कोई खास अंतर नहीं होता. दोनों ही शरीर में समान रूप से ब्लड शुगर स्पाइक पैदा करती हैं और उनकी न्यूट्रिशनल वैल्यू भी लगभग एक जैसी होती है. ब्राउन शुगर का रंग केवल मोलासेस मिलाने की वजह से होता है. इसमें कोई एक्स्ट्रा न्यूट्रिएंट नहीं होते हैं. बेहतर स्वास्थ्य के लिए सभी तरह की शुगर का सेवन कम करना चाहिए.
बायोकेमिस्ट की मानें तो ब्राउन शुगर और व्हाइट शुगर की न्यूट्रिशनल वैल्यू लगभग समान है.
Reality of Brown vs White Sugar: सफेद चीनी को सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है. कई लोग चीनी खाना बिल्कुल छोड़ देते हैं, ताकि उनकी हेल्थ बेहतर बनी रहे. खासतौर से डायबिटीज के मरीजों को सफेद चीनी बिल्कुल न खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे शुगर लेवल में अचानक उछाल आ सकता है. कई लोग सफेद चीनी को पूरी तरह अवॉइड करते हैं और इसकी जगह ब्राउन शुगर लेना पसंद करते हैं. अक्सर माना जाता है कि ब्राउन शुगर सेहत के लिए सफेद चीनी से बेहतर है. हालांकि सफेद चीनी और ब्राउन शुगर को लेकर फ्रेंच बायोकेमिस्ट ने एक बड़ा दावा किया है, जो चर्चाओं में है.
HT की रिपोर्ट के मुताबिक फ्रेंच बायोकेमिस्ट और मशहूर लेखिका जेसी इनचॉस्पे ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए बताया है कि ब्राउन शुगर को व्हाइट शुगर से ज्यादा हेल्दी माना जाता है, लेकिन यह काफी हद तक एक मिथक है. आज के समय में डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस या हेल्थ-कॉन्शियस लोग अक्सर ब्राउन शुगर को बेहतर विकल्प मानते हैं, लेकिन दोनों में खास अंतर नहीं है. ब्राउन शुगर का रंग और टेक्सचर इसे ज्यादा नेचुरल और पौष्टिक दिखाता है, जिससे लोगों को लगता है कि यह स्वास्थ्य के लिए बेहतर है. हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार ब्राउन और व्हाइट शुगर दोनों की न्यूट्रिशनल वैल्यू लगभग समान होती है. दोनों में कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट और शुगर कंटेंट लगभग एक जैसा होता है, इसलिए शरीर पर इनका असर समान ही पड़ता है.
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