Premature Greying of Body Hair: आजकल युवाओं के बाल तेजी से सफेद हो रहे हैं. सिर और दाढ़ी के बाल ही नहीं, बल्कि कम उम्र में छाती के बाल भी सफेद होने लगे हैं. इसे मेडिकल भाषा में प्रीमेच्योर ग्रेइंग कहा जाता है. आमतौर पर 50-60 साल की उम्र के बाद लोगों पर यह सफेदी आती थी, लेकिन अब युवा इस समस्या से परेशान नजर आ रहे हैं. कई लोग मानते हैं कि छाती के बाल सफेद होना कोई बीमारी है, जबकि कुछ लोग इसे प्रीमेच्योर ग्रेइंग से जोड़ते हैं. अब सवाल है कि कम उम्र में छाती के बाल क्यों सफेद हो रहे हैं, इसकी क्या वजह है और इससे किस तरह बचा जा सकता है? चलिए इसके जवाब डॉक्टर से जान लेते हैं.
यूपी के कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर और डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. युगल राजपूत ने News18 को बताया कि हमारे बालों का काला रंग मेलानिन नामक पिगमेंट के कारण होता है. जब शरीर में इसकी कमी होने लगती है, तो बाल सफेद होने लगते हैं. यह पिगमेंट शरीर के सभी हिस्सों पर असर डालता है. इसकी वजह से सिर और दाढ़ी ही नहीं, बल्कि छाती के बाल भी सफेद होने लगते हैं. यह पिगमेंट कई कारणों से कम हो सकता है. इनमें विटामिन्स की कमी, अत्यधिक तनाव, खराब खानपान, जेनेटिक और हार्मोनल फैक्टर्स शामिल हो सकते हैं. हेल्थ चेकअप से सही वजह का पता लगाया जा सकता है.
छाती के बाल सफेद होने की बड़ी वजह
पोषक तत्वों की कमी : डॉक्टर ने बताया कि आजकल की डाइट में पोषक तत्वों की कमी सफेद बालों का एक बड़ा कारण है. विटामिन B12 की कमी से एनीमिया हो सकता है, जो सीधे तौर पर बालों के सफेद होने से जुड़ा है. शरीर में आयरन और कॉपर की कमी मेलानिन के उत्पादन को प्रभावित करती है. इसकी कमी बालों की रंगत छीन लेती है.
खराब लाइफस्टाइल और स्मोकिंग : बीड़ी-सिगरेट पीने से हमारी ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे बालों के फॉलिकल्स तक सही मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते हैं. इसकी वजह से बाल सफेद होने लगते हैं. स्मोकिंग करने वालों में समय से पहले बाल सफेद होने का खतरा अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा होता है.
क्रोनिक स्ट्रेस : अगर आप लंबे समय से तनाव से जूझ रहे हैं, तो इससे आपके बाल समय से पहले सफेद हो सकते हैं. तनाव केवल दिमाग को ही नहीं, बल्कि शरीर के सेल्स को भी प्रभावित करता है. स्ट्रेस की वजह से शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जो मेलानोसाइट्स यानी मेलानिन बनाने वाले सेल्स को नुकसान पहुंचाता है.
हार्मोनल असंतुलन : शरीर में अगर हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ जाए, तो इससे भी सफेद बालों की समस्या पैदा हो सकती है. थायराइड की समस्या या शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में बदलाव भी छाती के बालों के सफेद होने का कारण बन सकता है. अगर आपको हार्मोनल समस्या है, तो इससे आपके बालों का रंग बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.
जेनेटिक्स : अगर आपके परिवार में पिता या दादा को कम उम्र में बाल सफेद होने की समस्या रही है, तो आपके साथ भी ऐसा होने की संभावना बढ़ जाती है. यह आपके DNA में होता है और इसे रोकना थोड़ा मुश्किल होता है. हालांकि आप सही डाइट और लाइफस्टाइल अपनाएं, तो इसे रोकने में मदद मिल सकती है.
सफेद बालों से बचाव कैसे करें?
डॉक्टर युगर राजपूत के अनुसार सफेद हो चुके बालों को प्राकृतिक रूप से वापस काला करना मुश्किल है, लेकिन इस प्रक्रिया को धीमा जरूर किया जा सकता है. अपनी डाइट में अंडा, मशरूम, हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स और डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल करें, ताकि विटामिन B12 और जिंक की पूर्ति हो सके. आप स्मोकिंग बंद कर दें. यह न केवल आपके फेफड़ों बल्कि आपके लुक्स के लिए भी जरूरी है. योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, ताकि स्ट्रेस कम हो. रात में 7-8 घंटे की नींद लेना भी जरूरी है. छाती के बालों पर हार्श साबुन या बॉडी वॉश का इस्तेमाल कम करें, क्योंकि इनमें मौजूद सल्फेट बालों को डैमेज कर सकते हैं. अगर आपके बाल बहुत तेजी से सफेद हो रहे हैं और साथ में कमजोरी या थकान महसूस होती है, तो एक बार डर्मेटोलॉजिस्ट से जरूर मिलें. वे ब्लड टेस्ट के जरिए सही वजह का पता लगाकर ट्रीटमेंट कर सकते हैं.