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Business Idea: बेगूसराय में लीची रसगुल्ला बिजनेस आइडिया इस समय खूब चर्चा में है. यहां के डॉ. रामपाल के अनुसार सस्ती लीची प्रोसेस कर पैक करने से कम लागत में ज्यादा मुनाफा और ग्रामीण रोजगार संभव है. आइये जानते हैं इसके बारे में.
बेगूसराय : बिजनेस आइडिया स्पेशल स्टोरी में आज चर्चा लीची रसगुल्ला की हो रही है. देखिए जब लीची का सीजन शुरू होता है तो बाजार में इसकी आवक बढ़ जाती है और कीमतों में गिरावट आ जाती है. ऐसे में यही लीची किसानों और बेरोजगार युवाओं के लिए कमाई का बड़ा मौका बन सकती है. लीची को सीधे बेचने के बजाय उसका वैल्यू एडिशन कर ‘लीची रसगुल्ला’ जिसे आप ‘कैन लीची’ के नाम से जानते हैं. इसे इस रूप में तैयार किया जाए तो मुनाफा कई गुना बढ़ाया जा सकता है. लोकल स्तर पर यह मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और बाजार में इसकी डिमांड भी लगातार बढ़ रही है. ऐसे में लोकल 18 पर कृषि विज्ञान केंद्र खोदावंदपुर , बेगूसराय से वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. रामपाल से समझते हैं. आइये जानते हैं इस बिजनेस आइडिया के बारे में.
जानें कैसे बनता है ये मुनाफे का यह मॉडल
कृषि वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. रामपाल ने बताया कि किसानों को सिर्फ कच्चा फल बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. बल्कि प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के जरिए अपनी आय बढ़ानी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब बाजार में लीची का दाम गिर जाता है.उसी समय सस्ते रेट पर लीची खरीदकर उसका रसगुल्ला तैयार करना सबसे फायदेमंद रहता है. इससे एक तरफ फल खराब होने से बचता है. वहीं, दूसरी तरफ उसकी वैल्यू कई गुना बढ़ जाती है.
कम लागत में बड़ा मुनाफा
डॉ. रामपाल के अनुसार 12 लीची के एक पैक को तैयार करने में करीब ₹25 की लागत आती है. इसमें लीची की कीमत, पैकिंग बॉक्स, शुगर सॉल्यूशन और अन्य छोटे खर्च शामिल हैं. यही पैक बाजार में ₹150 तक आसानी से बिक रहा है. उन्होंने बताया कि कुछ संस्थान और प्रोसेसिंग यूनिट इस प्रोडक्ट को इससे भी अधिक कीमत पर भी बेच सकते हैं. क्योंकि इसकी डिमांड काफी ज्यादा है और यह देखने में आकर्षक भी होती है.
महज ₹5000 की शुरुआती लागत से कोई भी व्यक्ति छोटे स्तर पर इसकी शुरुआत कर सकता है. धीरे-धीरे मार्केटिंग और डिमांड के अनुसार उत्पादन बढ़ाकर इसे बड़े स्तर तक ले जाया जा सकता है. सही रणनीति अपनाई जाए तो यह बिजनेस हर महीने ₹5000 से लेकर ₹50000 या उससे अधिक की कमाई कर सकता है.
जानें विशेषज्ञ की राय
डॉ. रामपाल ने यह भी बताया कि यह मॉडल सिर्फ व्यक्तिगत कमाई तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन का भी बड़ा माध्यम बन सकता है. गांव में छोटे-छोटे प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर स्थानीय लोगों को पैकिंग, प्रोसेसिंग और बिक्री से जोड़ा जा सकता है. इससे न सिर्फ बेरोजगारी कम होगी. बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी. उन्होंने किसानों और युवाओं से अपील की कि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ फलों का वैल्यू एडिशन जरूर अपनाएं. लीची रसगुल्ला जैसे उत्पाद न सिर्फ बाजार में नई पहचान बनाते हैं. बल्कि कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला सफल बिजनेस मॉडल भी साबित हो रहा है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें
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