रांची: झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले शशि भूषण एलोन एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चलाते हैं. यह कंपनी कई तरह की चीजों को अन्य देशों में एक्सपोर्ट करती है. खासतौर पर जितने भी मसाले होते हैं और जितने भी डिहाइड्रेट सब्जियां होती हैं. जैसे सूखा हुआ टमाटर, सूखा हुआ पत्ता गोभी, सूखा हुआ बीटरूट, गाजर यह सारा डिहाइड्रेट सब्जी, कई तरह की चटनी. कई तरह के मसाले पाउडर. यह उन चीजों को तैयार करते हैं.
शशि भूषण ने बताया कि वह इन सारी चीजों को यहां पर लोकल किसानों द्वारा बनवाते हैं और अन्य देशों में एक्सपोर्ट करते हैं. उन्होंने बताया कि वह रांची के आईएसएम से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किए हुए हैं. इसी सिलसिले में थाईलैंड भी गए हैं. इसीलिए इन सब चीजों की अच्छी जानकारी पहले से थी. आज भले ही उनका करोड़ों से ऊपर का टर्नओवर है, लेकिन शुरुआत में याद है कि एक चाय पीने के लिए सोचना पड़ता था.
विदेशी बाजार में है इन सब चीजों की भारी डिमांड
शशि भूषण बताते हैं कि होटल मैनेजमेंट कोर्स के बाद वह थाईलैंड और मलेशिया जैसे शहर गए थे. उन्होंने देखा कि वहां से जब वह मसाले लेकर जाते थे तो वहां इस साधारण मसाले को 1500-2000 इस तरह की रेट में खरीदते थे, लेकिन इस तरीके से बेचना सही नहीं था. तब उन्होंने सोचा क्यों ना लाइसेंस ले लिया जाए और यही काम किया जाए. वहां पर इसकी डिमांड अच्छी है और पैसे भी अच्छे मिलते हैं.
डिहाइड्रेट सब्जियों की हैं 30 वैरायटी
उन्होंने बताया कि विदेश में लोगों के पास समय नहीं है कि वह बाजार जाकर सब्जी खरीदें, फिर उसको धोएं, फिर काटे और फिर बनाएं. ऐसे में वहां पर यह डिहाइड्रेटेड सब्जी (कटा हुआ बस पानी में डालो काम हो जाएगा) इसकी काफी डिमांड रहती है. इसलिए उनके पास डिहाइड्रेट सब्जियों की कम से कम 25 से 30 वैरायटी है. इसके अलावा अदरक पाउडर, लहसुन पाउडर जिसका अपने नाम नहीं सुना होगा. हम वह भी रखते है.
उन्होंने आगे बताया कि इससे लोग इंस्टेंट 5 मिनट में ही खाना बना लेते हैं. विदेश में जाकर उन्होंने देखा कि इन सब चीजों की काफी डिमांड है. वहां लोगों के पास टाइम नहीं है और 5 मिनट में ही यह सारा काम करना चाहते हैं तो उन्होंने इसी को हथियार बनाया और एक्सपोर्ट में उतर गया.
आज है करोड़ों का टर्नओवर
शशि बताते हैं कि उनके माता-पिता साधारण परिवार से हैं. एकदम साधारण बैकग्राउंड है. मुश्किल से पढ़ाई पूरी कर पाया था. उस समय एक चाय पीने के लिए भी सोचना पड़ता था, लेकिन आज करोड़ों का टर्नओवर है. यह उनकी कंपनी का ज्वाइंट वेंचर है. उनके कोकर वाले ऑफिस में तो 15 से 20 लोग काम करते हैं, जो पिछले कई सालों से परमानेंट एम्पलाई हैं. पहले नौकरी ढूंढते थे. वह आज नौकरी लोगों को दे रहे हैं.
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