गर्मी शुरू होते ही इंडियन स्किन पर क्यों बढ़ जाते हैं काले धब्बे और झाइयां?

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गर्मी की शुरुआत होते ही त्वचा से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं. इनमें सबसे आम परेशानी है चेहरे पर काले धब्बे, झाइयां और असमान रंगत यानी पिगमेंटेशन. अक्सर लोग देखते हैं कि जैसे ही धूप तेज होती है, वैसे ही गाल, माथे और नाक के आसपास डार्क पैच दिखाई देने लगते हैं. यह सिर्फ धूप का असर नहीं होता, बल्कि गर्मी, पसीना, प्रदूषण और स्किन की सही देखभाल न करने की वजह से भी यह समस्या और बढ़ जाती है. यही कारण है कि गर्मियों की शुरुआत में ही त्वचा अपनी चमक खोने लगती है और दाग-धब्बे ज्यादा नजर आने लगते हैं.

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चेहरे को कैसे रखें ग्लोइंग.

गर्मी शुरू होते ही त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं सामने आने लगती हैं. इन्हीं में से सबसे आम समस्या है चेहरे पर काले धब्बे, झाइयां और असमान रंगत यानी पिगमेंटेशन. कई लोग नोटिस करते हैं कि जैसे ही धूप तेज होने लगती है, वैसे ही गालों, माथे और नाक के आसपास डार्क पैच दिखाई देने लगते हैं. यह समस्या सिर्फ धूप की वजह से नहीं होती, बल्कि गर्मी, पसीना, स्किन इंफेक्शन और हार्मोनल बदलाव भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं. भारतीय त्वचा पर इसका असर ज्यादा जल्दी और ज्यादा गहराई से देखने को मिलता है.

डॉ. अनिंदिता सरकार ने मनीकंट्रोल को बताया, भारतीय त्वचा में मेलेनिन की मात्रा अधिक होती है, जो हमें सूरज की हानिकारक किरणों से कुछ हद तक बचाता है. लेकिन यही मेलेनिन कई बार त्वचा को ज्यादा रिएक्टिव भी बना देता है. जब त्वचा पर तेज धूप, गर्मी या किसी तरह की सूजन होती है, तो मेलेनोसाइट्स नामक कोशिकाएं ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं और शरीर में अतिरिक्त रंग बनने लगता है. इसी वजह से त्वचा पर दाग-धब्बे और असमान रंगत की समस्या बढ़ जाती है.

सूरज की अल्ट्रावायलेट
सर्दियों के अंत और गर्मियों की शुरुआत यानी फरवरी के बाद से ही सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें तेज होने लगती हैं. इस समय लोग अक्सर सनस्क्रीन का इस्तेमाल गंभीरता से नहीं करते, जिससे त्वचा धीरे-धीरे नुकसान झेलने लगती है. धूप में लंबे समय तक रहना, पसीना और नमी वाला मौसम मिलकर त्वचा में जलन और सूजन पैदा करते हैं, जिससे पिगमेंटेशन और ज्यादा बढ़ जाता है. यही कारण है कि गर्मी शुरू होने से पहले ही त्वचा खराब दिखने लगती है.

शरीर में पानी की कमी
गर्मी के मौसम में एक और बड़ी समस्या होती है त्वचा की नमी कम हो जाना. जब शरीर में पानी की कमी होती है तो स्किन की बाहरी परत कमजोर हो जाती है. ऐसी कमजोर त्वचा आसानी से डैमेज हो जाती है और छोटे-छोटे पिंपल्स, रैशेज या एलर्जी के बाद वहां काले निशान छोड़ देती है. इसे पोस्ट इंफ्लेमेटरी हाइपरपिगमेंटेशन कहा जाता है, जो धीरे-धीरे त्वचा की रंगत को बिगाड़ देता है.

मेलाज्मा क्या है?
मेलाज्मा एक ऐसी स्थिति है जिसमें चेहरे पर भूरे या काले धब्बे दिखाई देते हैं, खासकर गाल और माथे पर. वहीं टैनिंग से पूरा चेहरा और खुला हुआ हिस्सा गहरा हो जाता है. कुछ लोगों में आंखों के आसपास भी काले घेरे बढ़ जाते हैं, जो थकान और धूप दोनों की वजह से और ज्यादा गहरे हो सकते हैं. इन समस्याओं से बचने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूरी है, चाहे आप घर के अंदर हों या बाहर. साथ ही त्वचा को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है, इसके लिए हल्के मॉइस्चराइज़र और पर्याप्त पानी पीना मदद करता है. विटामिन सी जैसे एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और रंगत को सुधारने में मदद करते हैं. इसके अलावा बहुत ज्यादा स्क्रबिंग या हार्श प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे पिगमेंटेशन और बढ़ जाता है.

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Vividha Singh

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें

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