Indore News: गेहूं की फसल काटकर मंडियों तक पहुंचने लगी है. लेकिन, किसानों को इसका उचित दाम नहीं मिल पा रहा है. इसी के चलते इंदौर कलेक्ट्रेट के बाहर जनहित पार्टी से जुड़े किसानों ने प्रदर्शन किया. उन्होंने मांग की कि सरकार ने चुनाव के दौरान जिस न्यूनतम समर्थन मूल्य का वादा किया था, उसे जल्द से जल्द लागू करे.
प्रदर्शन कर रहे अभय जैन ने लोकल 18 को बताया, किसानों को केवल समर्थन नहीं, बल्कि लाभकारी मूल्य मिले. मंडियों में फिलहाल किसानों को 2600 रुपए का रेट मिल रहा है, जबकि सरकार ने वादा किया था कि इस बार 2700 रुपए के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद की जाएगी. अब तक इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है.
धान, सोयाबीन के दाम भी कम
किसानों को मंडियों में भी लंबे समय इंतजार करना पड़ रहा है. सरकार ने धान के लिए 3100 रुपए का वादा किया था, लेकिन यह 2409 रुपए में ही खरीदा जा रहा है, जबकि सोयाबीन का रेट 6000 तय करने का वादा था, जो फिलहाल 5325 रुपए में लिया जा रहा है. मजबूरन किसानों को कम दाम पर बाहर के व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है.
आलू में ठगे जा रहे किसान
आगे कहा, कुछ फसलों में किसानों को लागत से भी कम दाम में मिल रहे हैं. आलू जैसी फसल जिसकी लागत ही 6 रुपए है, उसका मंडियों में किसानों को 2 रुपए किलो भाव मिल रहा है. ऐसे में वह अपना घर खर्च कैसे चलाएंगे. बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे, जबकि प्याज और टमाटर के साथ भी ऐसा ही हो रहा है. मजबूरन किसानों को कम भाव में बाहर बेचना पड़ रहा है.
स्वामीनाथन रिपोर्ट मानी जाए
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ ही मांग की कि स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार खाद, बीज, बिजली और श्रम के साथ-साथ जमीन की कीमत और मौसम के जोखिम को जोड़कर लाभकारी मूल्य तय हो. बिचौलियों के चंगुल से बचाने के लिए हर गांव में फसल बैंक की स्थापना हो, जहां उपज रखकर किसान जरूरत पड़ने पर ऋण ले सके.
कृषि न्यायालय स्थापित हो
कृषि न्यायालय की स्थापना होनी चाहिए. किसानों से जुड़े कई राजस्व के मामले होते हैं, जिनका सालों साल निपटारा नहीं हो पाता, साथ ही बिजली और पानी का भी उचित प्रबंध किया जाना चाहिए. फिलहाल बिजली की सप्लाई रात में की जाती है, जिसकी वजह से कड़कती ठंड में किसानों को खेत में पानी देने के लिए रात भर जागना पड़ता है.
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