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उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियां तेज हो गई हैं. प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 165 युवाओं को आपदा मित्र के रूप में प्रशिक्षित करना शुरू किया है. होमगार्ड और एसडीआरएफ की मदद से इन युवाओं को बाढ़, आग और मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की ट्रेनिंग दी जा रही है. कुल 800 आपदा मित्र तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है.
उज्जैन में होमगार्ड और एसडीआरएफ की टीमों ने 165 युवाओं को आपदा से बचने और बचाने की ट्रेनिंग दी है.
उज्जैन. सिंहस्थ 2028 महापर्व को लेकर तैयारियां अब जमीनी स्तर पर तेज होती नजर आ रही हैं. करोड़ों श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अभी से सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता दे रहा है. इसी कड़ी में “युवा आपदा मित्र” योजना के तहत 165 स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि मेले के दौरान घाटों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके. इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होती है. प्रशासन का मानना है कि प्रशिक्षित स्थानीय युवाओं की मौजूदगी से न सिर्फ तत्काल प्रतिक्रिया संभव होगी, बल्कि घटनाओं को समय रहते नियंत्रित भी किया जा सकेगा.
यही वजह है कि होमगार्ड और एसडीआरएफ की मदद से व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेगा. इसको लेकर चरणबद्ध तरीके से युवाओं का चयन और उनके प्रशिक्षण का दौर चलाया जा रहा है. बीते सिंहस्थ में होमगार्ड के जवानों ने सुरक्षा और आपदा से निपटने के लिए बखूबी भूमिका निभाई थी और कई लोगों की जान बचाई थी. सिंहस्थ में स्नान के दौरान कभी-कभी श्रद्धालु भूलवश गलतियां कर बैठते हैं और उनकी जान पर बन आती है. ऐसे में घाटों पर तैनात आपदा मित्र उनकी जान बचाते हैं.
क्या है युवा आपदा मित्र योजना
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की पहल पर “युवा आपदा मित्र” योजना चलाई जा रही है. इसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं को आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित करना है. उज्जैन जिले में इस योजना के तहत दूसरे चरण का प्रशिक्षण 23 मार्च से 29 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है.
165 युवाओं को दी जा रही विशेष ट्रेनिंग
इस प्रशिक्षण सत्र में 165 युवाओं को शामिल किया गया है. प्रशिक्षण होमगार्ड और SDRF के विशेषज्ञों द्वारा दिया जा रहा है. जिला सेनानी संतोष कुमार जाट के निर्देशन में यह पूरा कार्यक्रम संचालित हो रहा है. प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को बाढ़, भूकंप, आगजनी और मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थितियों से निपटने के तरीके सिखाए जा रहे हैं. मॉकड्रिल के जरिए उन्हें फायर एक्सटिंग्विशर का उपयोग, प्राथमिक उपचार और भीड़ नियंत्रण के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी जा रही है.
रामघाट पर बोट हैंडलिंग का अभ्यास
रामघाट पर युवाओं को बोट हैंडलिंग और रेस्क्यू ऑपरेशन की ट्रेनिंग दी गई. इसमें पानी में संतुलन बनाए रखने, नाव चलाने और डूबते लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की तकनीक सिखाई गई. प्रशासन का लक्ष्य जिले में कुल 800 प्रशिक्षित आपदा मित्र तैयार करना है. ये युवा न सिर्फ सिंहस्थ महापर्व में, बल्कि अन्य बड़े आयोजनों और आपदा की स्थिति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
भीड़ प्रबंधन में अहम भूमिका
सिंहस्थ में लाखों की संख्या में श्रद्धालु घाटों पर स्नान के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में भीड़ नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती होती है. प्रशिक्षित आपदा मित्र घाटों पर तैनात रहकर लोगों को दिशा देंगे और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करेंगे. यह पहल केवल सिंहस्थ तक सीमित नहीं है. प्रशासन इसे दीर्घकालिक निवेश के रूप में देख रहा है. स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवाओं की टीम तैयार होने से भविष्य में किसी भी आपदा से निपटने की क्षमता मजबूत होगी.
सुरक्षा और व्यवस्था का मजबूत संदेश
सिंहस्थ महापर्व 2028 को लेकर प्रशासन का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि इस बार सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं, ताकि आयोजन के समय किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सके.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें
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