Last Updated:
बाराबंकी के तौहीद अहमद की कहानी संघर्ष, हिम्मत और जुनून की मिसाल है. बचपन में पिता को खोने, गंभीर बीमारी और किडनी ट्रांसप्लांट जैसी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. फुटबॉल छोड़कर बैडमिंटन को अपनाया और अपनी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मेडल जीतकर देश और अपने जिले का नाम रोशन किया.
आज हम आपको बाराबंकी के एक ऐसे फेमस खिलाड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत और जुनून से बड़ा मुकाम हासिल किया. नवीगंज क्षेत्र के रहने वाले तौहीद अहमद का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ. बचपन से ही उन्हें खेलों का शौक था और फुटबॉल उनके दिल के बेहद करीब था, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उन्हें अपनी पसंदीदा खेल छोड़नी पड़ी. हार मानने की बजाय, उन्होंने खुद को बैडमिंटन में आजमाया. कड़ी मेहनत, लगन और अटूट विश्वास के दम पर उन्होंने बैडमिंटन में ऐसा मुकाम हासिल किया कि आज उनका नाम देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सम्मान के साथ लिया जा रहा है.
तौहीद अहमद के बचपन में ही उनके पिता का साया सिर से उठ गया था. इसके बाद उन्हें माइग्रेन सहित कई स्वास्थ्य समस्याएं हो गईं, जिनके चलते उन्हें दवाओं का सेवन करना पड़ा. दवाओं के दुष्प्रभाव से उनकी किडनी प्रभावित हुई और अंततः उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट कराना पड़ा.
किडनी ट्रांसप्लांट के संबंध में तौहीद अहमद ने बताया कि शुरुआत में जब उन्हें यह समस्या हुई तो परिवार ने साथ दिया, लेकिन कुछ समय बाद आर्थिक कारणों से उनका साथ छूट गया, क्योंकि किडनी ट्रांसप्लांट एक महंगी प्रक्रिया होती है. ऐसे में उनके मित्र प्रकाश यादव ने सच्ची दोस्ती निभाई और अपनी जमीन बेचकर उनके किडनी ट्रांसप्लांट में मदद की.
Add News18 as
Preferred Source on Google
वहीं फुटबॉल को अपना पसंदीदा खेल बताने वाले तौहीद ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के कारण वे फुटबॉल खेलने में असमर्थ हो गए. ऐसे में जनपद बाराबंकी के खिलाड़ी बलवीर ने उन्हें बैडमिंटन खेलने की सलाह दी.
तौहीद अहमद की मांसपेशियों में खिंचाव और शरीर पूरी तरह ठीक न होने के कारण उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा. इसी दौरान उन्होंने यूट्यूब पर जिले के तत्कालीन डीएम आदर्श सिंह का एक वीडियो देखा. उनकी फिटनेस से प्रभावित होकर उन्होंने उन्हें अपनी प्रेरणा बनाया और बाराबंकी के एक जिम में जाकर प्रैक्टिस शुरू कर दी.
पूरी तरह फिट होने के बाद तौहीद हरियाणा में 15 दिवसीय कैंप में बैडमिंटन खेले. इसके बाद उन्होंने 2023 में ऑस्ट्रेलिया में हुए वर्ल्ड ट्रांसप्लांट ओलंपिक में भाग लिया, जिसमें उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता. तौहीद बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में आयोजित इस विशेष ओलंपिक में केवल ट्रांसप्लांट करा चुके खिलाड़ी ही भाग लेते हैं.
तौहीद अहमद ने अपना पसंदीदा खेल फुटबॉल छोड़कर बैडमिंटन को अपनाया, जिसमें उन्होंने प्रदेश स्तर पर कई मेडल जीते. इसके अलावा उन्होंने अमेरिका में आयोजित ओलंपिक बैडमिंटन प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल जीता. साथ ही अन्य कई प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर उन्होंने न सिर्फ देश, बल्कि बाराबंकी जिले का नाम भी गौरवान्वित किया.
.