महुआ की ये देसी पूड़ी इतनी मीठी कि चीनी भी फेल! विंध्य का स्वाद बना रहा सबको दीवाना

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Vindhya Traditional Sweet Puri: महुआ मौहरी विंध्य क्षेत्र की एक पारंपरिक मीठी पूड़ी है, जो बिना चीनी या गुड़ के बनाई जाती है. इसमें महुआ के फूलों की प्राकृतिक मिठास होती है, जो इसे खास बनाती है. यह डिश स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. गर्मी के मौसम में इसे खाने से शरीर को ऊर्जा और ठंडक मिलती है. जानिए महुआ मौहरी बनाने का आसान तरीका और इसके फायदे.

Mahua Mohari Recipe: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र का खाना हमेशा से अपने देसी स्वाद और सेहतमंद गुणों के लिए जाना जाता है. यहां की थाली में मौसम के हिसाब से बनने वाले पारंपरिक व्यंजन आज भी खास जगह रखते हैं. उन्हीं में से एक है “महुआ मौहरी” एक ऐसी मीठी पूड़ी, जो स्वाद में जबरदस्त और सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है.

बिना चीनी-गुड़ के मीठा स्वाद कैसे?
महुआ मौहरी की सबसे खास बात ये है कि इसमें अलग से चीनी या गुड़ डालने की जरूरत नहीं पड़ती. दरअसल, महुआ के फूलों में खुद ही प्राकृतिक मिठास होती है. स्थानीय रसोइया प्रियंका सिंह बताती हैं कि सूखे महुआ के फूल और गेहूं के आटे से बनने वाली ये पूड़ी शरीर को ऊर्जा देती है और गर्मी में ठंडक भी पहुंचाती है.

कब और कैसे मिलते हैं महुआ के फूल
महुआ के फूल मार्च-अप्रैल में पेड़ों पर खिलते हैं. इनका रंग हल्का नारंगी-पीला होता है. इन्हें सुखाकर लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है, जिससे सालभर इस खास डिश का स्वाद लिया जा सकता है.

बनाने का आसान तरीका
महुआ मौहरी बनाना जितना आसान है, स्वाद उतना ही लाजवाब होता है. सबसे पहले सूखे महुआ के फूलों को साफ करके 5-6 घंटे पानी में भिगो दिया जाता है. इसके बाद इन्हें पीसकर पेस्ट बनाया जाता है और गेहूं के आटे में मिलाकर गूंध लिया जाता है. फिर छोटी-छोटी लोई बनाकर पूड़ी की तरह बेलते हैं और सरसों या अलसी के तेल में सुनहरा होने तक तलते हैं.

ऐसे करें सर्व
तैयार मौहरी को थोड़ा ठंडा करके आम के अचार या दही के साथ खाया जाता है. इसका हल्का मीठा स्वाद और देसी खुशबू हर किसी को पसंद आती है. महुआ मौहरी में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं. ये शरीर को ताकत देती है, इम्यूनिटी बढ़ाती है और गर्मी में राहत भी देती है.

परंपरा को जिंदा रखे हुए है ये डिश
आज के आधुनिक दौर में भी विंध्य क्षेत्र के गांवों में यह डिश लोगों की रसोई में बनी रहती है. यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और परंपरा की पहचान है.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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