कुलदेवी पूजा में पड़ोसी भी नहीं खटखटाता दरवाजा, अगर ऐसा किया तो होती है अनहोनी

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कुलदेवी पूजा में पड़ोसी भी नहीं खटखटाता दरवाजा, अगर ऐसा किया तो होती है अनहोनी

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Chhatarpur News: उन्होंने कहा कि पूजा के समय किसी भी दूसरी जात-बिरादरी का आना मना है. घर के दरवाजे पर भी आना बिल्कुल वर्जित है. घर की उरई (घर के द्वार पर गोबर से लीपना) में कोई खड़ा नहीं हो सकता है.

छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में अजब-गजब मान्यताएं हैं. जिले का सोनी परिवार सालों से अपनी कुलदेवी की पूजा करता आया है. मान्यता है कि इस पूजा के दौरान अगर कोई भी व्यक्ति घर के द्वार पर आ जाता है, तो उसके साथ निश्चित ही कुछ अनहोनी हो जाती है. ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ लोगों के साथ ऐसी अनहोनी हुई है, इसलिए लोग पूजा के दौरान घर के द्वार पर भी नहीं जाते हैं. कालीचरण सोनी ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि उनके परिवार में कुलदेवी की पूजा सैकड़ों सालों से चली आ रही है. यह पूजा पुरखों से चली आ रही है. इस पूजा में हमारी सोनी बिरादरी ही शामिल हो सकती है.

उन्होंने कहा कि हर साल नवरात्रि में हमारी कुलदेवी की पूजा होती है. शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि में एक दिन पूजा होती है. इसके अलावा भी एक बड़ी पूजा होती है. इस पूजा में देवी को जीव बलि भी दी जाती है. हमारे पुराने घर में आज भी देवी विराजमान हैं.

बड़ी पूजा में एक लाख रुपये का खर्च
कालीचरण ने आगे कहा कि देवी का प्रसाद हमारी बिरादरी में भी उन्हीं को मिलता है, जो पूजा में शामिल हुए हैं. हर किसी को नहीं मिलता है. नवरात्रि में तो पूरी खीर का प्रसाद चढ़ाया जाता है लेकिन बड़ी पूजा में बहुत से व्यंजन बनाए जाते हैं, साथ ही पशु बलि भी दी जाती है. इस पूजा में परिवार-रिश्तेदार शामिल होते हैं. इस पूजा में एक लाख रुपये के करीब खर्च आता है.

पूजा के दौरान दूसरों का प्रवेश वर्जित
उन्होंने कहा कि पूजा के दौरान किसी भी दूसरी जात-बिरादरी का आना मना है. घर के दरवाजे पर भी आना वर्जित है. हमारे घर की उरई (घर के द्वार पर गोबर से लीपना) में कोई नहीं खड़ा हो सकता है. अगर कोई गलती से आ गया, तो वह माफी मांग लेता है लेकिन अगर कोई जान-बूझकर गलती कर रहा है, तो देवी क्रोधित हो जाती हैं और उसके साथ अनहोनी भी हो जाती है.

पूजा न करने से संतान प्राप्ति में बाधा
कालीचरण ने आगे कहा कि हमनें कुछ सालों तक देवी की पूजा नहीं की, तो हम ही परेशान होने लगे थे. हमारे बेटे को संतान प्राप्ति में बाधाएं आ रही थीं. सालों-साल अस्पताल से लेकर यहां-वहां भटके लेकिन संतान नहीं हो रही थी लेकिन फिर से कुलदेवी की पूजा शुरू कर दी, तो आज हमारे यहां चार संतान आंगन में खेल-कूद रही हैं. पुत्र की प्राप्ति भी हुई है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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