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Gomphrina Plant Gardening Tips: भीलवाड़ा सहित राजस्थान में किचन गार्डन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें गॉम्फ्रीना पौधा लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है. यह पौधा कम पानी, तेज धूप और कम देखभाल में भी आसानी से पनपता है. हल्की दोमट मिट्टी और साधारण गमले में भी इसकी खेती की जा सकती है. इसके रंग-बिरंगे फूल लंबे समय तक खिलते रहते हैं और सूखने के बाद भी रंग नहीं छोड़ते. कम लागत और आसान रखरखाव के कारण यह घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ किचन गार्डन के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन गया है.
भीलवाड़ा सहित पूरे जिले में अब घरों के किचन गार्डन का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जहां लोग आसानी से उगने वाले और सौंदर्य बढ़ाने वाले पौधों को लगाने में रुचि दिखा रहे हैं. इसी क्रम में गॉम्फ्रीना (Gomphrena) का पौधा हाल ही में काफी लोकप्रिय हुआ है, क्योंकि इसे लगाने में ज्यादा मेहनत नहीं लगती और इसकी देखभाल भी बेहद आसान है. गर्मियों में जहां अधिकतर पौधे मुरझा जाते हैं, वहीं गॉम्फ्रीना तेज धूप और कम पानी में भी खूब खिलता है. यही कारण है कि पौधों के शौकीन लोग अपने घर के आंगन, बालकनी और किचन गार्डन में इसे लगाने की सलाह दे रहे हैं. यह पौधा न सिर्फ घर की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि कम खर्च में लंबे समय तक खिलता भी रहता है.
गॉम्फ्रीना का पौधा मुख्य रूप से हल्की दोमट मिट्टी में बहुत अच्छे से बढ़ता है. किचन गार्डन में इसे लगाने के लिए किसी खास व्यवस्था की जरूरत नहीं होती, बस मिट्टी में थोड़ा सा कंपोस्ट मिलाकर साधारण गमले में भी इसकी खेती की जा सकती है. पौधे को खूब धूप पसंद होती है, इसलिए इसे ऐसी जगह रखना चाहिए जहां कम से कम 5 से 6 घंटे धूप पहुंचे. बीज से पौधा तैयार करना बेहद आसान है और बीज अंकुरित होने में केवल 7 से 10 दिन लगते हैं. अगर घर में पहले से रखी खाद का इस्तेमाल किया जाए, तो लागत लगभग शून्य के बराबर होती है.
इसके पौधे की सबसे खास बात यह है कि एक बार लगाने के बाद यह महीनों तक खूबसूरत रंग-बिरंगे फूल देता रहता है. इनमें बैंगनी, गुलाबी, सफेद और लाल रंग के छोटे-छोटे फूल आते हैं, जो किसी भी कोने को आकर्षक बना देते हैं. गॉम्फ्रीना के फूलों की आयु लंबी होती है और गर्मी में भी ये फूल काले नहीं पड़ते. कई लोग इन फूलों का इस्तेमाल घर की सजावट, फ्लावर वास और पूजा के कार्यों में भी करते हैं. गॉम्फ्रीना को ‘एवरलास्टिंग फ्लावर’ भी कहा जाता है, क्योंकि सूखने के बाद भी इसका रंग नहीं बदलता और काफी समय तक सुंदर बना रहता है. इसी गुण के कारण शादी-ब्याह और अन्य आयोजनों में इन सूखे फूलों की भी खूब मांग रहती है.
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गॉम्फ्रीना का पौधा कम पानी में भी आसानी से पनपता है, इसलिए इसकी देखभाल बेहद आसान मानी जाती है. इसे रोजाना हल्का पानी या एक दिन छोड़कर सिंचाई करना पर्याप्त होता है. ज्यादा पानी देने से पौधे को नुकसान हो सकता है, इसलिए मिट्टी की नमी के अनुसार ही पानी देना चाहिए. इस पौधे पर कीट-पतंगों का असर भी बहुत कम होता है, जिससे दवाइयों की जरूरत नहीं पड़ती. किचन गार्डन के लिए यह एक आदर्श विकल्प है, क्योंकि कम मेहनत में यह ज्यादा हरियाली, सुंदरता और लंबे समय तक खिलने वाले फूल देता है.
शहरों में बढ़ते कंक्रीट और सीमित जगह के बीच अगर कोई पौधा घर की सुंदरता में चार चांद लगा सकता है, तो वह गॉम्फ्रीना ही है. इसे गमलों, हैंगिंग पॉट्स, यहां तक कि जमीन में भी आसानी से लगाया जा सकता है. इसकी लागत बेहद कम है और यह पौधा मौसम की मार भी खूब झेल लेता है, इसलिए कम जगह वाले घरों के लिए यह सबसे बेहतरीन विकल्पों में से एक बन गया है. कई गृहिणियां अपने किचन गार्डन में इसे इसलिए भी लगाती हैं, क्योंकि इसके फूल लंबे समय तक ताजगी देते हैं और घर का माहौल भी खुशनुमा बनाते हैं. कुल मिलाकर, गॉम्फ्रीना एक ऐसा पौधा है, जो सुंदरता, टिकाऊपन और आसान देखभाल तीनों खूबियों के साथ हर घर में नई रौनक जोड़ देता है.
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