दिव्यांग होने के कारण लोगों ने मारे ताने, आज यह डॉक्टर कई मरीजों का बने सहारा

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कहते हैं कि यदि हौंसला बुलंद हो तो कोई भी काम आसान नहीं होता है. ऐसी ही कहानी आजमगढ़ निवासी संतोष यादव की है, जो आज दिव्यांग होने के बाद भी लोगों का इलाज कर उनकी सेवा कर रहे हैं. आइए उनकी कहानी उनकी जुबानी ही जानते हैं.

मऊ: कहते हैं कि यदि हौसला बुलंद हो और कुछ करने का जज्बा हो, तो कोई कार्य कठिन नहीं होता है. यह जरूरी नहीं कि हमारे पूरे अंग सही हो, तभी हम कुछ कर सकते हैं. दिव्यांग रहते हुए भी एक अच्छा मुकाम हासिल किया जा सकता है. उसी का उदाहरण है आजमगढ़ जनपद के हरैया की चुंगी निवासी शिव प्रसाद यादव के घर 4 जून 1980 को जन्मे संतोष यादव की कहानी, जो दिव्यांग होते हुए भी हार नहीं माने और आज मऊ में एमबीबीएस बनकर मेडिकल ऑफिसर पद पर तैनात होकर लोगों की सेवा कर रहे हैं.

2012 ब्लड बैंक पर हुई पहली तैनाती
लोकल 18 से बात करते हुए डॉक्टर संतोष यादव बताते हैं कि प्रारंभिक पढ़ाई उनकी आजमगढ़ में हुई और साल 1995 में वेस्ली इंटर कॉलेज से हाई स्कूल और 1997 में इंटर पास किया. इंटर पास करने के बाद वह एमबीबीएस की तैयारी करने मेरठ चले गए और वहां से तैयारी शुरू की. तैयारी के दौरान लोग कई प्रकार के कमेंट करते थे, लेकिन कमेंट के बाद भी वह कभी हार नहीं माने. अपनी तैयारी करते रहे और 2012 में ब्लड बैंक आजमगढ़ में उनकी तैनाती हो गई.

बुआ के लड़के से मिली डॉक्टर बनने की प्रेरणा
वर्तमान में वह मऊ जनपद के मुहम्मदाबाद गोहना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मेडिकल ऑफिसर पद पर तैनात हैं. डॉ. संतोष यादव बताते हैं कि उनको डॉक्टर बनने की प्रेरणा उनके बुआ के लड़के से मिली और उन्होंने यह सोच लिया था कि अब उन्हें डॉक्टर बनना है. हालांकि पढ़ाई के दौरान कई प्रकार की परेशानियां हुई, क्योंकि पिताजी बचपन में ही एक्सपायर कर गए थे. चाचा दुर्गा प्रसाद यादव ने ही बचपन से उनका पालन-पोषण किया और डॉक्टर बनने तक काफी मदद की.

डॉक्टर बताते हैं कि जब वह पढ़ाई करते थे, तो जो लोग सही होते थे, वह कमेंट करते थे कि दिव्यांग होकर क्या डॉक्टर बनेगा. लेकिन उन्होंने कभी हौसला नहीं हारा और अपनी तैयारी करते रहे. हालांकि डॉक्टर बनने तक का सफर काफी संघर्ष भरा रहा. लेकिन आज उन्हें अच्छा लगता है कि वह एक स्थान पर बैठकर लोगों की सेवा कर रहे हैं.

दिव्यांगता को लेकर न हों निराश
उन्होंने बताया कि मैं हर उन दिव्यांगों से कहूंगा कि अपने दिव्यांगता को लेकर कभी निराश ना हों. यदि आपका हौसला बुलंद है, तो कोई कार्य कठिन नहीं है. आज के समय यदि आप पढ़ाई करने में तेज हैं, तो आपको नौकरी कोई भी आसानी से मिल सकती है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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