बरगी क्षेत्र में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की खंडहर हो चुकी इमारत से अवैध रूप से ईंट निकालते समय हुए हादसे में एक मजदूर की मौत के तीन दिन बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। मृतक के परिजनों को 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है, लेकिन जिस ठेकेदार के कहने पर मजदूर काम करने गया था, उसके खिलाफ अब तक पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया है। दीवार गिरने से दबा मजदूर, मौके पर ही मौत घटना 23 मार्च को हुई, जब बरगी के ग्राम मनकेड़ी निवासी धनीराम झारिया अपने साथियों छोटेलाल झारिया और एक अन्य व्यक्ति के साथ ट्रैक्टर लेकर सिंचाई विभाग की जर्जर बिल्डिंग से ईंट निकालने पहुंचे थे। ईंट निकालते समय अचानक दीवार का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया, जिसकी चपेट में आने से धनीराम झारिया मलबे में दब गया। साथियों ने उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। सूचना मिलने पर एनवीडीए के अधिकारी और बरगी पुलिस चौकी प्रभारी मौके पर पहुंचे और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। ठेकेदार के कहने पर पहुंचे थे मजदूर ट्रैक्टर चला रहे छोटेलाल झारिया ने बताया कि ट्रैक्टर बरगी निवासी नरहर पटेल का है और उसी के कहने पर वे लोग ईंट निकालने गए थे। मजदूरों को यह जानकारी नहीं थी कि बिल्डिंग सिंचाई विभाग की है और वहां काम करने की अनुमति नहीं है। बिना टेंडर के निकाली जा रही थीं ईंटें जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एनवीडीए की ओर से बिल्डिंग को डिसमेंटल करने के लिए कोई टेंडर जारी नहीं किया गया था। इसके बावजूद वहां से ईंटें निकाली जा रही थीं, जो प्रथम दृष्टया चोरी का मामला बनता है। परिजनों को 10 हजार की सहायता, कार्रवाई का इंतजार हादसे के बाद मृतक के परिजनों को 10 हजार रुपए की सहायता राशि दी गई है, लेकिन तीन दिन बीतने के बाद भी ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज नहीं होने से परिजनों और ग्रामीणों में नाराजगी है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। .