29 साल की लड़की, न शराब-न खराब भोजन, फिर भी हो गया कोलोन कैंसर, 2 मामूली वजह बना कारण

Girl colon cancer Reason: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी लड़की का खान-पान बेहद सादा हो. वह कोई नशा न करता हो, और इसके बावजूद उसे कैंसर हो जाए. लेकिन यह सच है. 29 साल की मोनिका चौधरी पूरी तरह से स्वस्थ थीं, लेकिन कैंसर ने अचानक ज़ोरदार झटका दिया. एक इंस्टाग्राम पोस्ट में इस उद्यमी ने बताया कि कैसे परिस्थितियां बदलीं और एक समय पर वह तनाव में घिरकर अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाईं. आखिरकार यह नजरअंदाजी उनके लिए भारी पड़ी और अंततः यह कैंसर का कारण बना. इसमें कोई संदेह नहीं कि कैंसर की कई वजहें हैं. खराब पर्यावरण, प्रदूषण, जीन जैसे इसके कारक हैं जिसपर व्यक्तिगत तौर पर कोई जोर नहीं है लेकिन आमतौर पर इन कारकों से कम ही मामलों में कैंसर होता है. फिर आखिर क्या वजह थी जिसके कारण 29 साल की इस लड़की को कैंसर हो गया.

देर तक काम और टारगेट का टेंशन

अपने पोस्ट में मोनिका ने लिखा है कि मैं हमेशा से एक फोकस्ड व्यक्ति रही हूं.खासकर जब बात मेरे स्वास्थ्य की आती है तो मैं हमेशा हेल्दी खाना खाती थी और अपने आहार का ध्यान रखती थी. मुझे तला या चिकना खाना कभी पसंद नहीं था. जब मैंने अपनी खुद की वेबसाइट पर काम शुरू किया, तो मुझे अंदाज़ा नहीं था कि यह कितना बड़ा और पूरी तरह समय लेने वाला हो जाएगा. लंबे समय तक लगातार काम, स्क्रीन टाइम, लगातार समय सीमा का दबाव और तनाव ने धीरे-धीरे मेरे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डालना शुरू कर दिया. मेरे दिन सुस्त होने लगे. मैं ज्यादा हिलती-डुलती नहीं थी, शायद ही कभी बाहर निकलती थी और अपनी शारीरिक दिनचर्या से पूरी तरह कट गई थी. इसका खामियाजा मुझे कोलोन कैंसर के रुप में चुकाना पड़ रहा है.

शरीर देने लगा संकेत

उन्होंने आगे कहा, यह मेरी पहले की जीवनशैली से एक बड़ा बदलाव था. मैं पहले बेहद सक्रिय रहती थी. शाम की दौड़ मेरी रोज़ाना की दिनचर्या का हिस्सा थीं. वे मेरे लिए एक तरह से राहत और थेरेपी थीं. जैसे-जैसे मैं काम में और डूबती गई मैंने अपने स्वास्थ्य को किनारे करना शुरू कर दिया. मैंने खुद से कहा कि मैं ‘जल्द’ फिर से इसे शुरू करूंगी लेकिन वह जल्द कभी नहीं आया. धीरे-धीरे मेरा शरीर संकेत देने लगा. थकान, बेचैनी, असहजता का दौर चल पड़ा. इन सबको मैंने नज़रअंदाज़ कर दिया. मैं काम में इस तरह मशगूल हो गई कि मेरी नींद चली गई. बहुत कम सोने लगी.

अचानक लगा झटका

इन सारे परिवर्तनों से गुजरते हुए एक दिन जब मोनिका को पता चला कि उसे कोलोरेक्टल कैंसर है, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. उसे स्टेज-4 कोलोरेक्टल कैंसर था. यह एक चौंकाने वाला पल था, जिसने सब कुछ बदल दिया. मोनिका कहती हैं, अब पीछे मुड़कर देखती हूं तो महसूस होता है कि यह सिर्फ बदकिस्मती नहीं थी. यह लंबे समय तक तनाव, थकावट और पूरी तरह से शारीरिक लापरवाही का परिणाम था. मैंने सबसे कठिन तरीके से सीखा कि कोई भी महत्वाकांक्षा आपके स्वास्थ्य से समझौते के लायक नहीं है. हमारा शरीर हमेशा हिसाब रखता है और आखिरकार वह किसी न किसी तरह ध्यान मांगता ही है.

खराब जीवनशैली कैसे कैंसर का कारण बनी

भले ही कोई एक कारक कैंसर का कारण नहीं बनता लेकिन तनाव, अत्यधिक काम और नींद की कमी इम्यूनिटी को कमजोर कर देते हैं. सूजन बढ़ाने लगता है और हार्मोन के नियमन को प्रभावित करते हैं. दरअसल, जब तनाव लगातार होने लगता है तो यह क्रॉनिक तनाव बन जाता है. इसका असर चिंता और भारीपन की भावना से आगे जाता है. लंबे समय तक लगातार तनाव में रहने से शरीर कोर्टिसोल और एड्रेनालिन (तनाव हार्मोन) का उत्पादन करता है. प्रतिरक्षा प्रणाली असामान्य कोशिकाओं को पहचानने में संघर्ष करने लगती है और लगातार सूजन बनी रहती है. तनाव हार्मोन का स्राव डीएनए को नुकसान पहुंचाता है और उन आवश्यक प्रोटीन को बाधित करता है जो कैंसर कोशिकाओं के विकास से लड़ते हैं. क्रॉनिक तनाव ऐसा वातावरण बनाता है जिसमें कैंसर कोशिकाएं आसानी से बढ़ती हैं और शरीर में फैल जाती हैं.

रेगुलर देर तक काम करना

जो लोग अत्यधिक काम करते हैं और पर्याप्त आराम नहीं लेते, उनमें कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. लंबे समय तक शिफ्ट और अनहेल्दी आदतों के बीच का संबंध गहरा है. ऐसे में लोग हेल्दी खाना नहीं खा पाते हैं. वे काम के समय हमेशा अनाप-शनाप खाने लगते हैं. ऐसे लोगों को एक्सरसाइज या शरीर में गतिविधियां लाने के लिए समय नहीं मिलता. यह सब स्मोकिंग और शराब पीने की बढ़ी हुई आदतों की ओर ले जाता है, जो पहले से ही कैंसर के स्थापित जोखिम कारक हैं. वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि काम से जुड़ा तनाव और लंबे समय तक कार्य स्तन, फेफड़े और कोलोरेक्टल कैंसर की दरों को बढ़ा सकते हैं.

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