ईरान दशकों से प्रतिबंध की मार झेल रहा है. रही सही कसर वहां महिलाओं की स्थिति और उन पर लगी नैतिक और ड्रेसकोड पाबंदियों ने पूरी कर दी. यानि तरक्की के ग्राफ में उसे समाज और विकास के हिसाब से जहां पहुंचना चाहिए था, वहां वो नहीं पहुंच सका. इजरायल और अमेरिका से अदावत ने उसकी हालत को खराब की. इन सबके बावजूद क्या आपको मालूम है कि ईरान के लोगों का आईक्यूब बहुत ऊंचा आंका जाता है. इस मामले में वो दुनिया के टॉप दस देशों में रहे हैं.
हालिया आईक्यू रैंकिंग्स को अगर देखें तो ईरान आमतौर पर 106-110 के औसत स्कोर के साथ टॉप टेन में शुमार होता रहा है. ईरान का मीडिया इसका श्रेय वहां की पढ़ाई और हेल्थ सिस्टम को देते हैं.
वैसे आपको बता दें कि पुराने अध्ययनों में ईरान का आईक्यू स्कोर कम दिखता था, लेकिन हाल के टेस्ट और एक वैज्ञानिक अध्ययन (2019) में युवाओं ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है, अब उनका स्कोर 97-105 के बीच आता है.
ये आंकड़े मुख्य तौर पर ऑनलाइन टेस्ट पर आधारित होते हैं इसलिए कई बार इनको लेकर सवाल भी उठते हैं. जो लोग ये टेस्ट देते हैं, वे अक्सर पढ़े-लिखे और मोटिवेटेड होते हैं. हालिया आंकड़ों से ईरान का औसत विश्व स्तर पर अच्छा दिखता है.
वर्ष 2025 की इंटरनेशनल आईक्यू टेस्ट स्टडी में 137 देशों के 13 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था, जिसमें ईरान की औसत आईक्यू 106.3 आंकी गई. इसके साथ वो दुनियाभर में चौथी पोजिशन पर रहा. उससे आगे चीन (107.19), साउथ कोरिया (106.43) और जापान (106.4) थे.
दुनिया के टॉप 10 देश
रैंक देश औसत IQ स्कोर (2026)
1 दक्षिण कोरिया 106.97
2 चीन 106.48
3 जापान 106.30
4 ईरान 104.80
5 ऑस्ट्रेलिया 104.45
6 रूस 103.78
7 सिंगापुर 103.56
8 मंगोलिया 102.61
9 न्यूजीलैंड 102.35
10 वियतनाम 102.26
आपको ये भी बता दें इस लिस्ट में अमेरिका 18वें स्थान पर है तो इज़राइल 48वें नंबर पर. ये सारा डेटा एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जहां लोग स्वेच्छा से परीक्षा देते हैं. हालांकि इसका मतलब ये भी है कि यह रैंकिंग किसी देश की पूरी आबादी को रिप्रजेंट नहीं करती, बल्कि उन लोगों का प्रतिनिधित्व करती है जिनके पास इंटरनेट की पहुंच है, जिन्होंने यह टेस्ट देने की इच्छा दिखाई.
ईरान की रैंकिंग ज्यादा क्यों
विश्लेषकों और रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के इस टॉप रैंक के पीछे कई कारण हो सकते हैं
ईरान में साक्षरता का स्तर बहुत अच्छा है. चाहे पुरुष हों या फिर महिलाएं, सभी का जोर अपनी पढ़ाई पर रहता है. (AI News18 Image)
शिक्षा में भारी निवेश – 1979 की क्रांति के बाद से ईरान सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में खासकर ग्रामीण इलाकों में भारी निवेश किया है. साक्षरता दर में जबरदस्त वृद्धि हुई है, जो युवाओं में 98-99% तक पहुंच गई है.
विज्ञान और इंजीनियरिंग पर जोर – ईरान में इंजीनियरिंग, विज्ञान और चिकित्सा जैसे विषयों को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है. दुनिया भर में सबसे ज्यादा इंजीनियरिंग के स्नातक पैदा करने वाले देशों में ईरान शीर्ष पांच में है.
प्रतिस्पर्धी माहौल – ईरान में विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए एक बहुत कठिन और प्रतिस्पर्धी परीक्षा “कोंकुर” होती है, जो छात्रों को ऊंचे स्तर की तैयारी के लिए प्रेरित करती है.
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कारण – फारस की प्राचीन सभ्यता की समृद्ध बौद्धिक विरासत और द्विभाषी होने का लाभ भी इसमें योगदान दे सकता है.
बहुभाषी होने का प्रभाव – शोध बताते हैं कि एक से अधिक भाषा बोलने वाले बच्चे कुछ IQ परीक्षणों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. ईरान में फारसी के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं का प्रचलन एक सहायक कारक हो सकता है.
भारत इसमें कहां
2026 के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, आईक्यू रैंकिंग में भारत का स्थान 50वां है. यहां के लोगों का औसत आईक्यू 98.44 मापा गया. हालांकि इसके पैरामीटर्स और मापने के तरीकों को लेकर मतभेद भी हो सकता है. कई बार इसके नमूनों का आकार बहुत ज्यादा बड़ा नहीं होता
क्या होता है आईक्यू
आईक्यू का मतलब इंटैलिजेंस कोशेंट होता है, जो व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता या बुद्धि की स्थिति को मापने का एक मानक है. यह तार्किक सोच, समस्या समाधान, गणितीय और भाषाई क्षमताओं का आकलन करता है. बेहतर आईक्यू वालों के बारे में माना जाता है कि वो जटिल समस्याओं को तेजी से हल कर सकता है. नई और अपरिचित स्थितियों में जल्दी अनुकूलन कर सकता है. गणित, कोडिंग, दर्शन को आसानी से समझ सकता है. पैटर्न और रुझानों को पहचानने में कुशल होता है.
जब हम कहते हैं कि ईरान, दक्षिण कोरिया या चीन आईक्यू में टॉप हैं, तो इसका सीधा मतलब यह नहीं कि वहां के लोग दुनिया के सबसे चालाक हैं. इसका मतलब आमतौर पर ये दिखाता है
– ये वे देश हैं जहां गणित और विज्ञान पर शुरू से ही जोर दिया जाता है. साक्षरता दर काफी ज्यादा है. इन देशों में शैक्षणिक उपलब्धि को परिवार और समाज में सर्वोच्च स्थान दिया जाता है. लेकिन ये बात भी है कि आईक्यू पूरी तरह से आपकी बुद्धि की क्षमता और उसके आयामों को जाहिर नहीं करता. भूख, कुपोषण, नींद की कमी, तनाव और शिक्षा की गुणवत्ता का IQ स्कोर पर गहरा प्रभाव पड़ता है. अगर किसी देश में पोषण की कमी है, तो वहाँ का औसत IQ अस्थायी रूप से कम हो सकता है.
बेहतर आईक्यू से क्या कर सकते हैं
उच्च IQ यानि औसत से ऊपर का आईक्यू कुछ व्यावहारिक लाभ देता है, हालांकि इसकी 100% गारंटी नहीं. ये लोग तेजी से किसी चीज को सीखते हैं. जटिल कांसेप्ट इन्हें आसानी से समझ में आती हैं. नई चीजें जल्दी सीख सकते हैं. ऐसे लोग साइंस, टैक्नॉलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ जैसे फील्ड में बेहतर प्रदर्शन करते हैं.
बेहतर आईक्यू वाले लोग आमतौर पर ऐसे लोग साइंस, टैक्नॉलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ जैसे फील्ड में बेहतर प्रदर्शन करते हैं. (AI News18 Image)
ऐसे लोगों को अकादमिक और करियर सफलता मिलती है. उच्च IQ वाले लोग अक्सर बेहतर स्वास्थ्य निर्णय लेते हैं. इन्हें मानसिक बीमारियां कम होती हैं, जीवनकाल लंबा होता है. नई स्थितियों में जल्दी एडजस्ट कर लेते हैं और क्रिएटिव सोच रखते हैं.
आईक्यू का औसत मानक 100 ही क्यों
आईक्यू (Intelligence Quotient) का औसत मानक 100 इसलिए रखा गया है क्योंकि यह एक सुविधाजनक और आर्बिटरेरी है लेकिन आसान संदर्भ बिंदु है. यह कोई जादुई या प्राकृतिक संख्या नहीं है, इसे केवल इसलिए चुना गया ताकि समझना और व्याख्या करना आसान हो. इसमें ये माना जाता है कि अगर 50 पर्सेंटाइल मध्य बिंदू है तो इसमें 50% लोग 100 से नीचे स्कोर करेंगे और 50% ऊपर स्कोर करते हैं. 100 का मतलब “औसत बुद्धिमत्ता” है – न अच्छा, न बुरा. ज्यादातर सफल लोग इसी रेंज में होते हैं.
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