बालाघाट में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा और भारत मुक्ति मोर्चा ने सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अंबेडकर चौक गार्डन से शुरू हुई यह रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां संगठनों ने राष्ट्रपति और केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन दिया। यह प्रदर्शन मोर्चा द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तीसरे चरण का हिस्सा था। ओबीसी जनगणना को बताया ‘हक की लड़ाई’ मोर्चा के प्रदेश महासचिव रामदास ठवकर ने रैली को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर ओबीसी वर्ग के साथ ‘धोखा’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनगणना के कॉलम में ओबीसी की जाति आधारित गणना का विकल्प न होना इस वर्ग की वास्तविक संख्या और स्थिति को छुपाने की साजिश है। संगठन की प्रमुख मांग है कि आगामी जनगणना में जाति आधारित आंकड़ों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। EVM हटाओ और ‘टीईटी’ से मुक्ति की मांग प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराने और ईवीएम (EVM) को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग दोहराई। इसके अलावा, संगठनों ने एससी, एसटी और ओबीसी के हितों के संरक्षण के लिए सख्त यूजीसी कानून लागू करने और 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की बाध्यता से मुक्त करने की पुरजोर वकालत की। 23 अप्रैल को ‘भारत बंद’ का आह्वान मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि यदि उनकी संवैधानिक मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन के चौथे चरण में 23 अप्रैल को राष्ट्रव्यापी ‘भारत बंद’ का आयोजन किया जाएगा। .