सूर्य के ताप से जल रही धरती, बिगड़ रहा क्लाइमेट बैलेंस, ऐसे ही नहीं आ रहे तूफान और तबाही

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Earth Climate Swings: धरती पर साल दर साल गर्मी बढ़ती जा रही है, जिसकी वजह कुछ और नहीं बल्कि जलवायु का बदलता हुआ संतुलन है. धरती पर आने वाली ऊर्जा की संतुलित वापसी नहीं होने की वजह से ये असंतुलन हो रहा है और धरती ऐसी-ऐसी आपदाएं देख रही है, जो पहले नहीं देखी थीं.

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धरती जल रही है, जलवायु असंतुलन का असर.

पृथ्वी की जलवायु अब तक के इतिहास में देखे गए किसी भी समय से ज्यादा असंतुलित हो चुकी है. ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती मात्रा वातावरण और महासागर को लगातार गर्म कर रही है और बर्फ भी तेजी से पिघल रही है. यह बात विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने विश्व मौसम विज्ञान दिवस के मौके पर कही. इस साल की थीम है – ‘आज का निरीक्षण, कल की सुरक्षा’. इसी दिन डब्ल्यूएमओ ने अपनी रिपोर्ट State of the Global Climate 2025 जारी की. इस रिपोर्ट में जलवायु के कई महत्वपूर्ण संकेतों का विश्लेषण किया गया है.

इनमें ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा, सतह का तापमान, महासागर की गर्मी और अम्लीकरण, समुद्र के जल स्तर में वृद्धि, अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ का क्षेत्रफल और ग्लेशियरों का पिघलना शामिल हैं. रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि 2015 से 2025 तक के 11 साल रिकॉर्ड पर सबसे गर्म साल रहे हैं. 2025 दूसरा या तीसरा सबसे गर्म साल रहा, जिसमें औसत तापमान 1850-1900 के औसत से करीब 1.43 डिग्री सेल्सियस ऊपर था. दुनिया भर में भयंकर मौसम की घटनाएं हुईं – तेज गर्मी, भारी बारिश और उष्णकटिबंधीय चक्रवात. इन घटनाओं ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई और अर्थव्यवस्थाओं तथा समाजों की कमजोरियों को उजागर कर दिया.

लगातार गर्म हो रहे हैं महासागर

महासागर लगातार गर्म हो रहा है और कार्बन डाइऑक्साइड को सोख रहा है. पिछले 20 सालों में महासागर हर साल मानव ऊर्जा उपयोग के लगभग 18 गुना के बराबर ऊर्जा सोख रहा है. 2025 में 2,000 मीटर गहराई तक महासागर की गर्मी का स्तर 1960 से शुरू हुए रिकॉर्ड में सबसे ऊंचा पहुंच गया, जो 2024 के पिछले रिकॉर्ड को भी तोड़ गया. अलग-अलग निगरानी स्टेशनों के आंकड़ों से पता चला कि तीन मुख्य ग्रीनहाउस गैसों – कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड की मात्रा 2025 में भी बढ़ती रही.

ऊर्जा असंतुलन बढ़ा रहा है गर्मी

इस रिपोर्ट में पहली बार पृथ्वी की ऊर्जा असंतुलन को मुख्य जलवायु संकेतक के रूप में शामिल किया गया है. पृथ्वी की ऊर्जा संतुलन वह दर मापता है, जिससे ऊर्जा पृथ्वी प्रणाली में प्रवेश करती है और बाहर निकलती है. पृथ्वी का ऊर्जा असंतुलन 1960 से शुरू हुए निरीक्षण रिकॉर्ड के बाद से बढ़ता जा रहा है, खासकर पिछले 20 सालों में. 2025 में यह एक नया रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. आपको बता दें कि ऊर्जा असंतुलन उसे कहते हैं, जब धरती पर सूर्य से आने वाली ऊर्जा, वापस जाने वाली ऊर्जा से अधिक हो जाती है. इसकी वजह से पृथ्वी की गर्मी वापस जाती ही नहीं और ये और गर्म होती जाती है.

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Prateeti Pandey

News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें

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