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Araria Success Story: अगर आप कम पूंजी में स्थायी और भरोसेमंद कमाई का विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो बकरी पालन आपके लिए बेहतरीन मौका बन सकता है. बिहार के अररिया जिले के किसान बाबा रवीन्द्र यादव ने साबित कर दिया है कि इस व्यवसाय से घर बैठे हर सीजन 1 से 2 लाख रुपये तक आसानी से कमाए जा सकते हैं. खास बात यह है कि बकरी पालन में लागत कम होती है, देखभाल आसान होती है और बाजार में बकरियों व उनके दूध की हमेशा मांग बनी रहती है, यही वजह है कि इसे ‘गरीबों का ATM’ भी कहा जाता है. रिपोर्ट- दिलकुश कुमार झा
बिहार के अररिया जिले के किसान बकरी पालन से सीजन में लाखों रुपये कमा रहे हैं. ऐसे ही एक किसान बाबा रवीन्द्र यादव बकरी पालन किए हुए हैं. उन्होंने बताया कि वह सीजन में घर बैठे 2 लाख रुपये आसानी से कमा लेते हैं. उनके यहां ग्रामीण इलाके में किसान बड़े पैमाने पर बकरी पालन कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि बकरी पालन पशुपालकों के लिए एक बेहतर विकल्प है. क्योंकि इसमें कम पूंजी में अधिक लाभ कमाया जा सकता है. इसे गरीबों का एटीएम भी कहा जाता है. क्योंकि इसमे लागत कम और मुनाफा अधिक है.
किसान बाबा रवीन्द्र यादव ने बताया कि अररिया जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन किसान तेजी से कर रहे हैं. यह किसानों के लिए एक मुनाफे का सौदा भी साबित हो रहा है. इसे उनके इलाके में ‘गरीबों का एटीएम’ के नाम से भी जाना जाता है. क्योंकि इसमें कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि आजकल बकरियों का हाट बाजार हर जगह आसानी से उपलब्ध है.
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ऐसे में पशुपालकों के आय के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प बन गया है. बकरी पालन पशुपालकों को कम समय में अच्छा मुनाफा देती है. चाहे किसान बकरियां बेचकर मुनाफा कमाएं या दूध का उत्पादन करके मुनाफा कमाए. उन्होंने करीब 10 साल पहले मात्र 7-8 बकरियों के साथ इस व्यवसाय की शुरुआत की थी और आज वे एक सीजन में 1 से 2 लाख रुपए तक की कमाई घर बैठे आसानी से कर लेते हैं.
किसान रवीन्द्र यादव ने लोकल 18 से बताया कि यह व्यवसाय बेहद कम लागत में शुरू किया जा सकता है. वर्तमान में उनके पास 10 बकरियां हैं. जहां आमतौर पर एक बकरी एक सीजन में दो बच्चे देती है. अगर वो ‘खस्सी‘ (बकरा) है तो उसकी बिक्री लगभग 8 से 10 हजार रुपए में आसानी से हो जाती है.
इस तरह वह घर बैठे बिना कुछ किए हुए 1 से 2 लाख रुपए आसानी से कमा लेते हैं. बता दें कि बिहार के अररिया में ब्लैक बंगाल, बरबरी, जमुनापारी, बीटल, सिरोही किस्म की बकरियों का पालन बड़े पैमाने पर किया जाता है. किसान रवीन्द्र यादव बताते हैं कि बाजार में खस्सी की हमेशा अच्छी मांग रहती है, जिससे उनकी बिक्री पर भी अच्छा मुनाफा मिलता है.
इसके अलावा, बकरी का दूध बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. इसकी भी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय होती है. बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर उन किसानों के लिए जिनके पास सीमित पूंजी है. यह उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और आर्थिक रूप से सशक्त करने का एक प्रभावी तरीका साबित हो रहा है.
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