Kamada Ekadashi 2026: कामदा एकादशी चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि को आती है. राम नवमी से दो दिन बाद. “कामदा” का अर्थ है सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली एकादशी. मान्यता है कि इस व्रत के फलस्वरूप व्यक्ति को हिंसा और बड़े से बड़े पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है. इसका वर्णन विशेष रूप से वराह पुराण और भविष्य पुराण में मिलता है.
वराह पुराण में एक कथा मिलती है जिसमें एक गंधर्व ललित को श्राप के कारण राक्षस योनि मिली थी. उसकी पत्नी ललिता ने कामदा एकादशी का व्रत किया, जिससे उसका श्राप समाप्त हो गया. इस साल कामदा एकादशी का व्रत 26 या 27 मार्च किस दिन किया जाएगी तारीख को लेकर कंफ्यूजन बना है. यहां जान लें कामदा एकादशी की सही तारीख, पूजा मुहूर्त और व्रत पारण समय.
कामदा एकादशी 2026 पूजा मुहूर्त
चैत्र शुक्ल एकादशी तिथि शुरू 28 मार्च 2026 को सुबह 8.45 से शुरू होगी और अगले दिन 29 मार्च 2026 को सुबह 7.46 तक रहेगी. चूंकि एकादशी व्रत उदयातिथि अनुसार किया जाता है. 29 मार्च को सूर्योदय में एकादशी तिथि रहेगी इसलिए इस दिन व्रत रखना शास्त्रसम्मत रहेगा.
- पूजा मुहूर्त – सुबह 7.48 – दोपहर 12.26
- व्रत पारण समय – सुबह 6.14 – सुबह 7.09 (30 मार्च 2026)
कामदा एकादशी की पूजा विधि
- दशमी तिथि से ही सात्विक आहार लेकर व्रत का संकल्प लें.
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें.
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें.
- पूजा स्थान को शुद्ध करें.
- भगवान विष्णु की मूर्ति/चित्र स्थापित करें.
- दीपक, धूप जलाएं.
- तुलसी दल, पीले पुष्प, फल अर्पित करें.
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें.
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.
- एकादशी व्रत कथा सुनें.
- भजन-कीर्तन और भगवान का स्मरण करें.
- द्वादशी के दिन पूजा के बाद व्रत खोलें और दान करें.
क्या करें
- सात्विक जीवनशैली अपनाएं
- भगवान भगवान विष्णु का ध्यान करें
- दान-पुण्य करें
- तुलसी की पूजा करें लेकिन जल न चढ़ाएं
क्या न करें
- चावल का सेवन न करें
- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें
- क्रोध, झूठ और नकारात्मकता से बचें
- दिन में अधिक सोने से बचें
कामदा एकादशी व्रत क्यों खास है
“एकादशी” का अर्थ है ग्यारह (11) — जो 10 इंद्रियों और 1 मन का प्रतीक है. इस दिन व्रत रखकर व्यक्ति अपनी इंद्रियों और मन को नियंत्रित करता है, जो भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है. एकादशी तिथि पर चंद्रमा का प्रभाव मन पर विशेष होता है. इस दिन उपवास और ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है.
एकादशी व्रत करने से मिलते हैं ये 3 लाभ
- उपवास (शरीर की शुद्धि)
- भजन-कीर्तन (मन की शुद्धि)
- दान-पुण्य (कर्म की शुद्धि)
किन लोगों को एकादशी व्रत करना चाहिए?
आध्यात्मिक उन्नति चाहने वाले
जो लोग भक्ति, ध्यान और आत्मिक शांति की खोज में हैं, उनके लिए एकादशी व्रत अत्यंत लाभकारी है.
पापों से मुक्ति चाहने वाले
शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत पापों का नाश करता है और जीवन को शुद्ध बनाता है.
मनोकामना पूर्ति के इच्छुक
जो लोग धन, संतान, सफलता या सुख-शांति चाहते हैं, उन्हें यह व्रत करना चाहिए.
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