Balaghat News : मध्य प्रदेश के बालाघाट में कभी जिस रास्ते से नक्सली आया करते थे अब उसी रास्ते से हाथी आ रहे हैं. दरअसल, इन दिनों बालाघाट जिले के किरनापुर वन क्षेत्र में हाथी आया हुआ है. बताया जा रहा है कि बीते एक हफ्ते पहले बाघ नदी पार कर आया है. ऐसे में लांजी और किरनापुर के जंगलों के किनारे पर बसे गांवों में अलर्ट जारी किया गया है. लेकिन एक सवाल सभी के मन में गूंज रहा है कि बालाघाट के जंगल में हाथी कैसे आया है.
फिलहाल हाथी की लोकेशन किरनापुर वन परिक्षेत्र के सिरका और मंडवाझरी बीट में पाई गई थी. लांजी वन विभाग के एसडीओ राकेश कुमार अड़कने ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि सिरका के जंगल में हाथी के पद चिन्ह और विष्ठा पाई गई है. यह इस बात की पुष्टि करता है कि बालाघाट के जंगलों में अब हाथी की मूवमेंट है.
एडवांस ड्रोन और ट्रैप कैमरों का इस्तेमाल
अब वन विभाग एक्शन मेंवन विभाग का अमला अब सचेत हो चुका है. ऐसे में हाथी पर नजर बनाए रखने के लिए ड्रोन और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके लिए एडवांस ड्रोन और ट्रैप कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. वहीं, वन्य प्राणी हाथी और मानव के बीच विवाद न हो इसके लिए वन विभाग मुस्तैद हो गया है. इसके लिए विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही है.
वहीं, ग्रामीणों को एडवाइजरी जारी कर सावधान रहने की सलाह दी गई है. दरअसल, ग्रामीणों को अकेले जंगल न जाने की सलाह दी जा रही है. वहीं, हाथी के दिखने पर भी उसे न छेड़ने की अपील की गई है. इसके साथ ही हाथी के दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना देने की अपील की
अब जानिए कहा से आया हाथी
वन विभाग लांजी के एसडीओ राकेश कुमार अड़कने ने लोकल 18 को बताया कि हाथी कहा से आया है इसके लिए महाराष्ट्र शासन के वन विभाग से बात की गई. उन्होंने बताया कि हाथी गढ़चिरौली की ओर से आया है. जिस दल से हाथी आया है उस दल में करीब 27 से 28 हाथी है. उसका विचरण क्षेत्र महाराष्ट्र के दक्षिण गोंदिया तक है. ऐसे में वह अपने दल से निकल आया है.
जानिए क्यों दल से निकलते हैं हाथी
वन विभाग एसडीओ राकेश कुमार अड़कने ने बताया कि हाथी दो वजहों से इस इलाके में आ गया है. एक तो कि वह अपने दल से भटक हो और वह इस तरफ आ गया. वहीं, दूसरी तरफ हाथी दल अपने लिए नई टेरिटरी ढूंढने के लिए एक हाथी को भेजता है. इसके बाद अनुकूल वातावरण मिलने के बाद बाकी दल को भी लेकर आ जाता है और वह नए स्थान पर बस जाते हैं. ऐसे में ये भी माना जा सकता है कि इलाके की हरियाली देख हाथियों का कुनबा इस इलाके में बस सकता है.
वहीं, वन विभाग का कहना है कि वह सिर्फ हाथी की मूवमेंट पर नजर रखेगा. उसे किसी स्थान पर ले जाने के लिए कोई खास प्रयास नहीं करेगा. ऐसे सिर्फ इस बात का ख्याल रखेगा कि हाथियों और मानव के बीच कोई द्वंद न हो.
इसके पहले भी आ चुका है हाथी
बालाघाट के लांजी क्षेत्र में अब से करीब चार साल पहले हाथी की दस्तक दर्ज की गई थी. इसके बाद वह धीरे-धीरे खुद ही कान्हा नेशनल पार्क की ओर चला गया. तब उसे वन विभाग ने ट्रेनिंग दी और उसे पालतू बना लिया. वैसे देखा जाए तो मध्य प्रदेश में बांधवगढ़ में हाथियों का एक लंबा इतिहास रहा है. लेकिन बालाघाट में हाथी सिर्फ अतिथि या प्रवासी के रूप में ही दर्ज किया गया है.
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