झाबुआ जिले सहित थांदला और पेटलावद में शनिवार को ईद-उल-फितर का पर्व उत्साह और सादगी के साथ मनाया गया। सुबह से ही नगर की प्रमुख ईदगाहों और मस्जिदों में मुस्लिम समाज के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचकर नमाज अदा की। इस दौरान जामा मस्जिद और मुख्य ईदगाह पर निर्धारित समय पर खुदा की बारगाह में सिर झुकाकर देश की खुशहाली की कामना की गई। मजहब का मूल उद्देश्य लोगों को जोड़ना नमाज के अवसर पर पेश इमाम ने अपने संबोधन में ‘देश और इंसानियत प्रथम’ का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्मों को मानने के बावजूद हमारी पहली पहचान भारतीय के रूप में है। इमाम ने जोर कहा कि मजहब का मूल उद्देश्य लोगों को जोड़ना है और आतंकवाद जैसी बुराइयां इस्लाम की शिक्षाओं के विपरीत हैं। उन्होंने बेगुनाहों की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की। आधुनिक शिक्षा और विकास पर जोर दें इमाम साहब ने समाज के युवाओं का आह्वान किया कि वे दीनी तालीम के साथ-साथ आधुनिक और तकनीकी शिक्षा को भी अनिवार्य रूप से अपनाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज देश के विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकता है। नमाज के बाद सामूहिक दुआ में भारत को अशांति और बुरी नजर से महफूज रखने तथा आपसी भाईचारा बनाए रखने की प्रार्थना की गई। चाक-चौबंद रही सुरक्षा व्यवस्था पर्व के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस और प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था रही। नमाज के बाद सदर जावेद लोदी, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष नटवर सिंह डोडियार और मीडिया प्रभारी सैयद वसीम सहित विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक प्रतिनिधियों ने समाजजनों को बधाई दी। लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर सिवैयां और शीर-खुरमा का आनंद लिया, जिससे बाजारों में भी रौनक बनी रही। .