डिजिटल स्कैम पर सरकार ने WhatsApp को दिया आदेश, डिवाइस ID होगी ब्लॉक

डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमिटी (IDC) की बैठक में सरकार ने मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप से कहा है कि वह उन डिवाइस आईडी को ब्लॉक करे, जो इन स्कैम्स में इस्तेमाल हो रही हैं. इससे ठग बार-बार नए अकाउंट नहीं बना पाएंगे. आपको बता दें कि डिजिटल अरेस्ट एक सोफिस्टिकेटेड साइबर फ्रॉड होता है. स्कैमर्स खुद को पुलिस, CBI, ED या अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारी बताते हैं.

वे वीडियो कॉल पर लोगों को डराते हैं कि वह किसी गंभीर अपराध में शामिल है. फिर वे पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं ताकि “अरेस्ट” से बच सकें. स्क्रीन शेयरिंग और म्यूल अकाउंट्स के जरिए पैसे जल्दी कई बैंकों और राज्यों में ट्रांसफर हो जाते हैं, जिससे ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में ऐसे 1.23 लाख मामले दर्ज हुए, जिनमें कुल 1,935 करोड़ रुपये की ठगी हुई. यह 2022 के मुकाबले लगभग तीन गुना ज्यादा है. कुल मिलाकर इन घोटालों से लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में खुद संज्ञान लिया था और इस बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता जताई थी.

हाई-लेवल कमिटी की बैठक

यूनियन होम मिनिस्ट्री द्वारा दिसंबर 2025 में गठित IDC की तीसरी बैठक की गई थी. ये बैठक तीन घंटे चली. WhatsApp के प्रतिनिधियों ने अपनी डिटेक्शन सिस्टम, एक्शन और सेफगार्ड्स पर विस्तार से जानकारी दी. कमिटी ने कई सुझाव दिए, जिन पर WhatsApp ने अमल करने का वादा किया है. सरकार ने WhatsApp को कई सुझाव दिए है.

डिवाइस आईडी ब्लॉक करना

ये सुझाव डिजिटल अरेस्ट मामलों में इस्तेमाल होने वाली डिवाइस आईडी को पहचानकर ब्लॉक करने का मैकेनिज्म लाएं. इसके लिए 45 दिनों में अलग प्रस्ताव सौंपें.

सेफ्टी फीचर्स

स्काइप जैसे ऐप्स में होने वाले फीचर्स लाएं, जैसे कॉलर की ज्यादा जानकारी, संदिग्ध अकाउंट पर वार्निंग सिग्नल और स्कैम नेटवर्क की बेहतर डिटेक्शन. 30 दिनों में प्रस्ताव देने को कहा है.

गलत फाइल्स रोकना

गलत APK और इसी तरह की कंटेंट को डिटेक्ट और ब्लॉक करने के टेक्निकल मैकेनिज्म मजबूत करें. लंबे स्कैम कॉल्स को पहचानने और रोकने के सेफगार्ड्स विकसित करें. एक महीने में प्रस्ताव दें.

यूजर डेटा रिटेंशन

डिलीट हुए अकाउंट्स का डेटा कम से कम 180 दिनों तक रखें, जैसा IT रूल्स 2021 में अनिवार्य है.

AI और मशीन लर्निंग बढ़ाना

इम्पर्सोनेशन, ऑफिशियल लोगो का दुरुपयोग और AI-जनरेटेड कंटेंट डिटेक्ट करने के लिए AI/ML सिस्टम का विस्तार करें. समय-समय पर प्रोग्रेस अपडेट दें.

SIM बाइंडिंग

दूरसंचार विभाग (DoT) के नवंबर 2025 के निर्देशों पर ध्यान दें और उन्हें फॉलो करें. व्हाट्सएप को एक्टिव SIM से ही लिंक करें, ताकि अनाम या मल्टी-डिवाइस यूज बंद हो. 4-6 महीने में लागू करें और मार्च अंत तक एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दें.

इन्वेस्टिगेशन में सहयोग

फ्रॉड नेटवर्क, पुलिस इम्पर्सोनेशन और गवर्नमेंट सिंबल्स के दुरुपयोग पर फ्लैग्ड सिग्नल्स पर समय पर रिस्पॉन्स दें. सिंथेटिक कंटेंट को लेबल करने के नए IT रूल्स को फॉलो करें.

यूजर सिक्योरिटी बढ़ाने के लिए जरूरी कदम

व्हाट्सएप ने कई कमिटमेंट्स दिए हैं. कंपनी पहले से ही पुलिस लोगो डिटेक्शन और मीडिया मैचिंग सिस्टम लगा रही है, ताकि दिल्ली पुलिस, मुंबई पुलिस, CBI जैसे लोगो वाले प्रोफाइल फोटो वाली अकाउंट्स हटाई जा सकें. यह कदम यूजर सिक्योरिटी बढ़ाने, जांच एजेंसियों की मदद करने और नेशनल सिक्योरिटी व डेटा प्रोटेक्शन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए हैं. होम मिनिस्ट्री और मेटा (व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी) ने कमेंट के लिए संपर्क पर कोई जवाब नहीं दिया. जनवरी-फरवरी 2026 में ही 11.6 करोड़ रुपये की ठगी हुई. ऐसे में लोगों को सतर्क रहना जरूरी है. इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी “पुलिस” कॉल पर पैसे न ट्रांसफर करें. शक होने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करके जानकारी दें.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *