एक ग्राम चांदी से सिर्फ 1 सेंटीमीटर में बना दी पूरी अद्भुत प्रतिमा! आखिर कैसे?

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Unique Statue In India : उदयपुर के डॉ. इकबाल सक्का ने भगवान झूलेलाल जयंती पर 1 सेंटीमीटर की चांदी की कलाकृति बनाई है, जिसमें भगवान झूलेलाल को पल्ला मछली पर दिखाया गया है. इस प्रतिमा की खास बात यह है कि इसमें भगवान झूलेलाल को समुद्र में तैरती पल्ला मछली पर विराजमान दिखाया गया है, जो सिंधी समाज में आस्था का प्रतीक मानी जाती है.

उदयपुर. उदयपुर के स्वर्ण शिल्पी डॉ. इकबाल सक्का ने एक बार फिर अपनी अनोखी कला से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. इस बार उन्होंने भगवान झूलेलाल जयंती के अवसर पर चांदी में बेहद सूक्ष्म और आकर्षक कलाकृतियां तैयार की हैं, जो अपनी बारीकी और भावनात्मक जुड़ाव के कारण खास मानी जा रही हैं.

इन कलाकृतियों में न सिर्फ शिल्प की महीनता दिखाई देती है, बल्कि उसमें आस्था और श्रद्धा का गहरा भाव भी झलकता है. यही वजह है कि जो भी इन्हें देखता है, वह इनकी बारीकी और सुंदरता को देखकर हैरान रह जाता है.

एक सेंटीमीटर में समाई पूरी आस्था
डॉ. सक्का ने भगवान झूलेलाल के बाल रूप की बेहद छोटी प्रतिमा तैयार की है, जिसे दुनिया की सबसे सूक्ष्म कलाकृतियों में गिना जा सकता है. इस प्रतिमा की खास बात यह है कि इसमें भगवान झूलेलाल को समुद्र में तैरती पल्ला मछली पर विराजमान दिखाया गया है, जो सिंधी समाज में आस्था का प्रतीक मानी जाती है. इस पूरी कलाकृति का आकार मात्र 1 सेंटीमीटर है, जिसे बिना लेंस के साफ देख पाना मुश्किल है. इसमें भगवान झूलेलाल को बाल रूप में दर्शाते हुए उनके हाथ में एक छोटा धार्मिक ग्रंथ भी दिखाया गया है, मानो वे उसे पढ़ रहे हों.

इसके साथ ही एक लाल रंग की धार्मिक पताका, एक छोटी तलवार और एक अन्य पल्ला मछली को भी बेहद बारीकी से उकेरा गया है. पूरी रचना में राष्ट्रीय तिरंगा झंडा भी शामिल किया गया है, जो इसमें देशभक्ति का भाव जोड़ता है.

तीन दिन की मेहनत और एक ग्राम चांदी
डॉ. सक्का ने बताया कि इस पूरी कलाकृति को तैयार करने में केवल 1 ग्राम चांदी का उपयोग किया गया है. इतनी छोटी आकृति में भाव, आकार और संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. उन्होंने बताया कि इस काम को पूरा करने में लगातार तीन दिन का समय लगा. हर छोटी से छोटी रेखा को उकेरते समय धैर्य और एकाग्रता की जरूरत होती है, तभी जाकर ऐसी कलाकृति आकार ले पाती है.

उन्होंने यह भी साझा किया कि इन विशेष कलाकृतियों को वे गुजरात के कच्छ स्थित झूलेलाल तीर्थ धाम मंदिर को भेंट करने जा रहे हैं. यह मंदिर भगवान झूलेलाल का एक प्रमुख आस्था स्थल माना जाता है, जहां एक विशाल 11 मंजिला प्रतिमा का निर्माण भी जारी है. डॉ. सक्का ने मंदिर ट्रस्ट को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि इन सूक्ष्म चांदी की कलाकृतियों को मंदिर परिसर में बनने वाले संग्रहालय में स्थान दिया जाए. उनका मानना है कि इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस अनोखी कला को करीब से देख सकेंगे और इससे जुड़ी आस्था को महसूस कर पाएंगे.

About the Author

Anand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

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