LPG Crisis: देश में LPG सप्लाई संकट का असर अब सीधे किचन और कंज्यूमर बिहेवियर पर दिखने लगा है. गैस सिलेंडर की अनिश्चित उपलब्धता के बीच लोगों का झुकाव तेजी से रेडी-टू-ईट और पैकेज्ड फूड की ओर बढ़ा है. ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon India के मुताबिक, उसके प्लेटफॉर्म पर इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड मील, स्नैक्स और बेवरेजेज जैसी कैटेगरी में 15 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की गई है.
कंपनी का कहना है कि यह ट्रेंड सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि हैदराबाद, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों के साथ-साथ सोनीपत और पणजी जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी साफ दिखाई दे रहा है. Amazon India के प्रवक्ता ने कहा, “पिछले कुछ हफ्तों में हमने ऐसे रेडी-टू-कंज्यूम मील सॉल्यूशंस की मांग में लगातार बढ़ोतरी देखी है, जिन्हें बनाने में बहुत कम समय लगता है. इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड मील, स्नैक्स और बेवरेजेज जैसी कैटेगरी Amazon.in पर 15 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ दर्ज कर रही हैं.”
क्विक कॉमर्स से बढ़ा ट्रेंड
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर Amazon की क्विक कॉमर्स सेवा ‘Amazon Now’ पर दिखा है. यहां रेडी-टू-ईट और पैकेज्ड फूड की बिक्री महीने-दर-महीने करीब 20 फीसदी तक बढ़ी है. खासकर दिल्ली-NCR, मुंबई और बेंगलुरु के कुछ इलाकों में ग्राहक तेजी से फास्ट डिलीवरी विकल्पों पर निर्भर हो रहे हैं.
हालांकि, यह बदलाव सिर्फ इंस्टेंट शॉपिंग तक सीमित नहीं है. Amazon के मुताबिक, लोग अभी भी जरूरी ग्रोसरी जैसे स्टेपल्स, कुकिंग ऑयल, ड्राई फ्रूट्स और बेवरेजेज की प्लान्ड खरीदारी कर रहे हैं. यानी उपभोक्ता व्यवहार में एक साथ ‘इंस्टेंट सुविधा’ और ‘जरूरी स्टॉकिंग’ का संतुलन देखने को मिल रहा है.
इसी ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए Amazon India ने ‘Ready to Eat Store’ लॉन्च किया है, जहां अलग-अलग ब्रांड्स के तैयार खाने के विकल्प एक ही जगह उपलब्ध कराए गए हैं.
LPG संकट का बड़ा कारण
दरअसल, इस पूरे ट्रेंड के पीछे वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव और सप्लाई चेन में आई बाधाएं अहम वजह मानी जा रही हैं. उद्योग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, मार्च के पहले पखवाड़े में भारत में LPG खपत 17.7 फीसदी तक गिर गई. इस दौरान कुल खपत 1.147 मिलियन टन रही, जो पिछले साल के इसी समय की तुलना में 17.3 फीसदी कम है और फरवरी के पहले पखवाड़े की तुलना में 26.3 फीसदी नीचे है.
भारत अपनी LPG जरूरतों का करीब 60 फीसदी आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरता है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान की प्रतिक्रिया से यह रास्ता प्रभावी रूप से बाधित हुआ, जिससे सप्लाई पर असर पड़ा.
सरकार का आश्वासन
इस बीच केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कदम उठाए हैं. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, “स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन हम घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह सप्लाई दे रहे हैं.”
उन्होंने बताया कि रिफाइनरियों को घरेलू उत्पादन बढ़ाने और उसे घरेलू किचन के लिए प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं. शुरुआती चरण में होटल-रेस्तरां जैसे व्यावसायिक उपयोग के लिए LPG सप्लाई घटाई गई थी, जिसे बाद में सामान्य खपत के करीब एक-पांचवें हिस्से तक बहाल किया गया.
बदलता कंज्यूमर ट्रेंड
विश्लेषकों का मानना है कि अगर LPG सप्लाई संकट लंबा खिंचता है, तो रेडी-टू-ईट और इंस्टेंट फूड का यह ट्रेंड और तेज हो सकता है. इससे न सिर्फ ई-कॉमर्स कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर असर पड़ेगा, बल्कि देश में खाने-पीने की आदतों में भी स्थायी बदलाव देखने को मिल सकता है. फिलहाल, गैस संकट और किचन की चुनौतियों के बीच ‘इंस्टेंट सुविधा’ ही उपभोक्ताओं का नया सहारा बनती नजर आ रही है.
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