देश में दवाओं का कितने महीने का है स्टॉक? क्या भारत में हो सकती है कमी?

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ईरान-इजराइल युद्ध के चलते भारत में दवाओं की कमी होने और दवाओं के महंगा होने के दावे क‍िए जा रहे हैं, हालांक‍ि ऑल इंडिया कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन के प्रेसिडेंट कैलाश गुप्ता का कहना है क‍ि भारत में दवाओं का पूरा स्‍टाॅक है और अभी इनकी कीमतें बढ़ने की भी कोई आशंका नहीं है.

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ईरान-इजराइल युद्ध के बीच क्‍या भारत में दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं? आइए एक्‍सपर्ट से जानते हैं.

ईरान और इजराइल-यूएस के बीच युद्ध को छिड़े 18 दिन हो गए हैं. युद्ध की इस विभीषिका का असर पूरे मिडिल ईस्ट के देशों के आम जन-जीवन पर भी दिखाई दे रहा है. वहीं भारत में भी एलपीजी की किल्लत से परेशानी बढ़ रही है. हालांकि इस दौरान भारत में दवाओं की कमी को लेकर भी दावे किए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि भारत को कच्चे माल की आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के चलते दवाएं महंगी हो सकती हैं. ऐसे में मौजूदा संकट के चलते यह सवाल भी जरूरी हो जाता है कि देश में फिलहाल दवाओं का स्टॉक कितना है? क्या इस युद्ध का असर दवाओं पर दिखाई देने लगा है? आइए जानते हैं इस बारे में एक्सपर्ट की क्या राय है?

ऑल इंडिया कैमिस्ट एंड ड‍िस्‍ट्रीब्‍यूटर्स फेडरेशन के प्रेसिडेंट कैलाश गुप्ता का कहना है कि युद्ध या ऐसी आपदाओं की वजह से आयात और निर्यात से जुड़े मामलों में असर पड़ता है लेकिन अभी भारत में किसी भी दवा की कोई कमी नहीं है और न ही ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से कोई दवा महंगी हुई है. दिल्ली का भागीरथ प्लेस एशिया का सबसे बड़ा और थोक दवा बाजार है, यहां अभी कई महीनों का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में मौजूद है.चूंकि भारत जेनेरिक दवाओं का बड़ा निर्माता और सप्लायर है तो जल्दी ही कमी या कीमतें बढ़ने की कोई आशंका भी नहीं दिखाई दे रही है.

क्या भारत में हो सकती है दवाओं की कमी?
नहीं फिलहाल देश में किसी भी दवा की कोई कमी नहीं है. आने वाले कुछ महीनों में भी ऐसा होने की संभावना नहीं है. भारत के पास दवाओं का पर्याप्त स्टॉक है.

भारत में कितने दिन का स्टॉक है?
एशिया के सबसे बड़े दवा बाजार भागीरथ प्लेस में अभी सभी दुकानदारों के 3 से 4 महीने तक दवाओं का स्टॉक है. सिर्फ रिटेलर ही नहीं डिस्ट्रीब्यूटर और कंपनियों के पास भी पर्याप्त मात्रा में दवाओं का भंडार है.

क्या बाहर से आने वाली दवाओं की हो सकती है कमी?
ज्यादातर दवाएं भारत में बनती हैं. बाहर से बहुत कम मात्रा में दवाएं आती हैं. इनमें भी ज्यादातर कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाएं होती हैं, हालांकि कुछ दवाओं के विकल्प अब भारत में भी बनने लगे हैं.

ओवर प्राइसिंग या कमी की कहां कर सकते हैं शिकायत?
अगर आप अनावश्यक रूप से दवाओं की कीमतें बढ़ती देखते हैं तो नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी में शिकायत कर सकते हैं. एनपीपीए में दवाओं की ओवरचार्जिंग, दवाओं की कमी और गैर अनुमति प्राप्त नई दवाओं को बेचने को लेकर शिकायत कर सकते हैं. इसके लिए फार्मा जन समाधान पोर्टल पर जाकर ईमेल या कॉल के द्वारा शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.

अफवाह पर न दें ध्यान
कैलाश गुप्ता कहते हैं कि कई बार दवाओं की किल्लत और कमी बोलकर दवा कंपनियां नाजायज फायदा उठाती हैं और दवाओं के दाम बढ़ा देती हैं या सरकार पर बढ़ाने के लिए गैरजरूरी दवाब डालती हैं. कई बार पैनिक करके एक ही दवा के अन्य ब्रांडों की दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए भी ऐसा हथकंडा अपनाया जाता है लेकिन फिलहाल ऐसी किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें. इस युद्ध का भारत के ड्रग मार्केट पर खास असर नहीं है.

About the Author

प्रिया गौतमSenior Correspondent

प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीन‍ियर हेल्‍थ र‍िपोर्टर काम कर रही हैं. इन्‍हें प‍िछले 14 साल से फील्‍ड में र‍िर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्‍त है. इससे पहले ये ह‍िंदुस्‍तान द‍िल्‍ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें

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