दो दिन रहेगी चैत्र अमावस्या: 18 मार्च को करें पितरों के लिए धूप-ध्यान और दान-पुण्य, 19 मार्च से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि

5 घंटे पहले

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18 और 19 मार्च को दो दिन चैत्र मास की अमावस्या है। ये तिथि 18 तारीख की सुबह 8.25 बजे से शुरू होगी और 19 की सुबह 6.52 तक रहेगी। इसके बाद चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शुरू हो जाएगी। इसीलिए चैत्र नवरात्रि की शुरुआत भी हो रही है। चैत्र नवरात्रि 27 मार्च तक रहेगी। इन दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पितरों के लिए धूप-ध्यान दोपहर में करीब 12 बजे करना चाहिए, 18 तारीख की दोपहर में चैत्र अमावस्या रहेगी, इसलिए इस दिन दोपहर में पितरों से शुभ कर्म करना ज्यादा शुभ है। 19 की सुबह 6.52 बजे अमावस्या तिथि खत्म हो जाएगी, इसलिए इस दिन सुबह-सुबह अमावस्या पर किया जाना वाला नदी स्नान कर सकते हैं।

अमावस्या से जुड़ी मान्यताएं

अमावस्या पर पितरों की तृप्ति और आशीर्वाद पाने की कामना से तर्पण, पिंडदान और दान करने की परंपरा है। ऐसा करने से कुंडली का पितृ दोष भी शांत होता है।

मान्यता है कि इस दिन किए गए नदी स्नान, दान-पुण्य और पूजा से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। रुके कार्यों में गति मिलती है और दुख दूर होते हैं।

अमावस्या तिथि पर पितृलोक से पूर्वज पृथ्वी पर अपने वंशजों को देखने आते हैं। इसलिए इस तिथि पर उनके लिए तर्पण और भोजन अर्पित करने की परंपरा है। शास्त्रों में लिखा है कि अमावस्या पर किया गया तर्पण और दान पितरों को तृप्त करता है और वे अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

इस तिथि पर कौवे, गाय, कुत्ते और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने की परंपरा है।

अमावस्या पर करें ये शुभ कर्म

  • चैत्र अमावस्या पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें। जल में कुमकुम, चावल और फूल डालें। इसके बाद ऊँ सूर्याय नम: मंत्र जप करते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं।
  • दोपहर में करीब 12 बजे गाय के गोबर से बना कंडा जलाएं। जब कंडे से धुआं आना बंद हो जाए, तब अंगारों पर गुड़-घी डालें। पितरों का ध्यान करें। हथेली में जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों को अर्पित करें। गुड़-घी के साथ ही खीर-पुड़ी भी अर्पित कर सकते हैं।
  • शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत अर्पित करें। बिल्व पत्र चढ़ाएं, चंदन का लेप करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें।
  • इस तिथि पर पीपल के पेड़ की पूजा भी करनी चाहिए। पीपल के पास दीपक जलाएं और सात परिक्रमा करें।
  • घर में विराजित बाल गोपाल का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें। भगवान को नए वस्त्र पहनाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें। माखन-मिश्री का भोग तुलसी के पत्तों के साथ लगाएं।
  • सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं। तुलसी की परिक्रमा करें। ध्यान रखें शाम को तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए। दूर से ही तुलसी की पूजा करें।
  • हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर ऊँ रामदूताय नम: मंत्र का जप करें। इसके साथ ही सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।

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