प्रभु श्रीराम की प्यास बुझाने वाले कुंड पर चली जेसीबी, ग्रामीणों के आक्रोश के बाद प्रशासन ने रोका काम

जिस कुएं ने प्रभु श्रीराम, माता सीता व भ्राता लक्ष्मण की प्यास बुझाई थी, उस कुएं को संरक्षित करने की बजाय उसे बंद कर ग्रामीण के लिए आरईएस नया कुआं बना …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 16 Mar 2026 07:55:15 PM (IST)Updated Date: Mon, 16 Mar 2026 07:55:14 PM (IST)

ये फोटो AI से बनाई गई है…

नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। जिस कुएं ने प्रभु श्रीराम, माता सीता व भ्राता लक्ष्मण की प्यास बुझाई थी, उस कुएं को संरक्षित करने की बजाय उसे बंद कर ग्रामीण के लिए आरईएस नया कुआं बनाएगा। दरअसल मझगवां विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नयागांव में फलाहारी आश्रम के पास स्थित रामायण काल से जुड़े बताए जा रहे प्राचीन कुंड को ध्वस्त किए जाने का मामला प्रकाशित होने व ग्रामीणों के विरोध और शिकायत के बाद ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग के कार्यपालन यंत्री (ईई) लांजरूस केरकेट्टा ने शनिवार को मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की।

ठेकेदार को काम रोकने के निर्देश

जांच के दौरान यह प्रमाणित पाया गया कि फलाहारी तालाब के विस्तारीकरण कार्य के दौरान ठेकेदार द्वारा जेसीबी मशीन से प्राचीन कुंड को पाट दिया गया था, जबकि पास स्थित एक पुराने कुएं की पार भी क्षतिग्रस्त हो गई। यह दोनों जलस्रोत भगवान राम के वन गमन मार्ग से लगे प्राचीन पवित्र स्थान हैं और स्थानीय लोगों की आस्था से जुड़े हैं। आरईएस के अधिकारियों ने ठेकेदार रामबाबू सिंह को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक कुएं का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक तालाब से संबंधित आगे का काम बंद रखा जाए।

50 फीट दूर बनेगा नया कुआं

अधिकारियों ने यह भी तय किया है कि आश्रम और स्थानीय लोगों की सुविधा को देखते हुए लगभग 50 फीट दूर एक नया कुआं बनाया जाएगा, ताकि पानी की व्यवस्था प्रभावित न हो। इसके बाद ही आगे के निर्माण कार्य पर निर्णय लिया जाएगा। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि तालाब के निर्माण और विस्तार कार्य से आश्रम में उपयोग में आने वाले प्राचीन कुएं पर भी असर पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए फिलहाल तालाब के विस्तारीकरण कार्य को रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

अधिकारी बोले- जानकारी नहीं थी

ग्राम पंचायत नयागांव के सरपंच गणेश सिंह ने बताया कि विभाग को पहले ही प्राचीन जलस्रोतों को सुरक्षित रखने की अपील की गई थी, लेकिन इसके बावजूद कुंड को बचाया नहीं जा सका। वहीं आरईएस के कार्यपालन यंत्री लांजरूस केरकेट्टा का कहना है कि उन्हें पहले कुंड और कुएं के बारे में जानकारी नहीं थी। शिकायत मिलने के बाद उन्होंने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिए हैं। मामले की आगे भी निगरानी की जाएगी।

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