Last Updated:
How to Identify Chemical Bananas : बाजार में मिलने वाले कई केले केमिकल की मदद से पकाए जाते हैं. ये केले दिखने में आकर्षक जरूर होते हैं, लेकिन सेहत के लिए ठीक नहीं. ऐसे में जरूरी है कि खरीदते समय यह पहचान लिया जाए कि केला प्राकृतिक रूप से पका है या केमिकल की मदद ली गई है. अक्सर मांग ज्यादा होने पर व्यापारी कच्चे केले को जल्दी पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल कर लेते हैं. लोकल 18 से ऋषिकेश की गृहिणी पूनम बताती हैं कि केले की पहचान का सबसे आसान तरीका उसका डंठल देखना है. केमिकल से पके केले अक्सर एकदम चमकीले होते हैं. आइये जानते हैं.
केला भारत में सबसे ज्यादा खाए जाने वाले फलों में से एक है. सस्ता, पौष्टिक और तुरंत ऊर्जा देने वाला यह फल लगभग हर घर में मिलता है. लेकिन बाजार में मिलने वाले कई केले प्राकृतिक तरीके से नहीं बल्कि केमिकल की मदद से जल्दी पकाए जाते हैं. ऐसे केले दिखने में आकर्षक जरूर होते हैं, लेकिन स्वाद और सेहत दोनों पर असर डाल सकते हैं. इसलिए जरूरी है कि खरीदते समय यह पहचान लिया जाए कि केला प्राकृतिक रूप से पका है या केमिकल से.
अक्सर मांग ज्यादा होने और जल्दी सप्लाई देने के लिए व्यापारी कच्चे केले को जल्दी पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल कर लेते हैं. इससे केला जल्दी पीला जरूर हो जाता है, लेकिन अंदर से वह पूरी तरह पका हुआ नहीं होता. कई बार ऐसा केला ऊपर से सुंदर दिखता है लेकिन स्वाद में फीका या हल्का कच्चा लगता है.
लोकल 18 से ऋषिकेश की गृहिणी पूनम बताती हैं कि केले की पहचान का सबसे आसान तरीका उसका डंठल देखना है. अगर केले का डंठल हल्का हरा या प्राकृतिक रंग का है तो समझिए कि केला पेड़ पर ही धीरे-धीरे पका है. लेकिन अगर पूरा केला एकदम पीला हो और डंठल भी सूखा या गहरा पीला दिखाई दे तो शक हो सकता है कि उसे जल्दी पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया गया हो.
Add News18 as
Preferred Source on Google
प्राकृतिक रूप से पके केले का रंग थोड़ा असमानी होता है. कहीं हल्का पीला, कहीं थोड़ा हरा या छोटे-छोटे भूरे धब्बे भी दिखाई दे सकते हैं. यही असली पहचान मानी जाती है. इसके उलट केमिकल से पके केले अक्सर एकदम चमकीले और पूरी तरह समान पीले रंग के दिखते हैं. ऐसा रंग देखने में अच्छा जरूर लगता है, लेकिन यह हमेशा प्राकृतिक पकने की निशानी नहीं होता.
प्राकृतिक केले में हल्की मीठी खुशबू होती है और स्वाद भी गहरा मीठा लगता है. जब आप इसे खाते हैं तो अंदर का गूदा मुलायम और रसदार महसूस होता है. केमिकल से पके केले कई बार बाहर से नरम लेकिन अंदर से थोड़े सख्त या बेस्वाद हो सकते हैं. कुछ लोगों को उनमें हल्की अजीब सी गंध भी महसूस होती है. इसलिए स्वाद और खुशबू भी पहचान का अच्छा तरीका है.
केमिकल से पकाए गए फल लंबे समय तक खाने से सेहत पर असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फलों में पोषण भी कम हो सकता है. प्राकृतिक रूप से पके केले शरीर को भरपूर ऊर्जा, फाइबर और पोटैशियम देते हैं. इसलिए अगर आप रोजाना केला खाते हैं तो यह जानना जरूरी है कि वह सही तरीके से पका हुआ है या नहीं.
केमिकल से पकाए गए फल लंबे समय तक खाने से सेहत पर असर पड़ सकता है. ऐसे फलों में पोषण भी कम हो सकता है. प्राकृतिक रूप से पके केले शरीर को भरपूर ऊर्जा, फाइबर और पोटैशियम देते हैं. इसलिए अगर आप रोजाना केला खाते हैं तो यह जानना जरूरी है कि वह सही तरीके से पका हुआ है या नहीं. थोड़ी सी सावधानी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है.
.