चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से: इस बार हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 में 13 महीने, एक साल में चार बार आती है नवरात्रि


देवी पूजा का उत्सव चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रहा है। ये पर्व 27 मार्च तक चलेगा। चैत्र नवरात्रि के साथ ही हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 भी शुरू हो जाएगा। इस बार हिन्दी वर्ष 12 नहीं 13 महीनों का रहेगा, क्योंकि संवत् 2083 में एक अधिकमास भी है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, चैत्र नवरात्रि और आश्विन नवरात्रि में आम भक्त देवी दुर्गा के नौ स्वरूपो की पूजा करते हैं, जबकि माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि गुप्त होती है, इन दिनों में तंत्र-मंत्र से जुड़े साधक देवी सती की दस महाविद्याओं की साधना करते हैं। इस तरह एक साल में चार बार नवरात्रि आती है- दो प्रकट नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि। हिन्दी पंचांग के अनुसार इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च की सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 20 मार्च की सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसी वजह से 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत मानी जा रही है। नौ दिनों तक चलने वाले ये पर्व 27 मार्च को रामनवमी के साथ खत्म होगा। नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना यानी कलश स्थापना की जाती है। कलश को माता दुर्गा का प्रतीक माना जाता है। घटस्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाली पूजा शुरू हो जाती है। कई लोग इन दिनों व्रत रखते हैं और सुबह-शाम माता की आरती करते हैं। मंत्र जप, ध्यान और देवी मां के ग्रंथों का पाठ करते हैं। इन दिनों में देवी के 51 शक्तिपीठों में काफी भक्त पहुंचते हैं। इस साल 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ मास का अधिकमास रहेगा यानी ज्येष्ठ दो महीनों का रहेगा। इस वजह से संवत् 2083 13 महीनों का होगा। संवत्सर का नाम रौद्र है। बृहस्पति ग्रह राजा और मंगल ग्रह मंत्री है। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। यह महीना भगवान विष्णु की पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस समय लोग जप, तप, दान, कथा, तीर्थ और पूजा-पाठ करते हैं, हालांकि इस महीने में शादी, गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरू करने लिए शुभ मुहूर्त नहीं होते हैं। चैत्र नवरात्रि पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है, जिन्हें शक्ति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है, जो तप और आत्मसंयम की प्रेरणा देती हैं। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जिनकी आराधना से भय दूर होता है और साहस बढ़ता है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। माना जाता है कि उनकी कृपा से ज्ञान और समृद्धि मिलती है। पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना होती है, जो मातृत्व और संतान सुख का आशीर्वाद देती हैं। छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है और मान्यता है कि उनकी कृपा से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं। नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। उन्हें बुरी और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। आठवें दिन मां महागौरी की आराधना की जाती है, जिनकी पूजा से जीवन में शांति और पवित्रता आती है। नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। मान्यता है कि वे अपने भक्तों को सिद्धि, सफलता और पूर्णता का आशीर्वाद देती हैं। .

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