Bikanervala Success Story: आज जिस बीकानेरवाला के नमकीन और मिठाइयों के बिना शादियां अधूरी मानी जाती हैं. उसका साम्राज्य किसी आलीशान फैक्ट्री से नहीं, बल्कि दिल्ली की तंग गलियों में एक बाल्टी से शुरू हुआ था. 1956 में बीकानेर से दिल्ली आए दो भाइयों केदारनाथ (काका) और सत्यनारायण ने घर-घर जाकर हाथ से बने रसगुल्ले बेचना शुरू किया. जो आज करोड़ों के ग्लोबल ब्रांड में तब्दील हो चुका है. सटकॉन 2026 में पहुंचे बीकानेरवाला के निदेशक रमेश कुमार ने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने खुद बचपन में अपने हाथों से समोसे और कचौड़ी तैयार किए हैं. 22 साल की उम्र में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कमान संभाली. 1990 में उन्होंने जोखिम उठाते हुए शुद्ध शाकाहारी रेस्टोरेंट की शुरुआत की. जो उस दौर में एक नया और साहसी प्रयोग था. आज बीकानेरवाला के साथ 11000 लोग जुड़े हुए हैं. दुनिया भर में इसकी 250 से ज्यादा शाखाएं हैं. अकेले दुबई में 17 आउटलेट्स हैं. जबकि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे देशों में भी यह देसी स्वाद अपनी पहचान बना चुका है. नवरात्रि की स्पेशल थाली की शुरुआत करने वाला यह ब्रांड आज शुद्धता और परंपरा का पर्याय बन गया है.
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