हिंदू नववर्ष पर बाबा महाकाल का विशेष अभिषेक, नीम के जल से होगा स्नान

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Ujjain News: सुबह 7.30 बजे होने वाली बालभोग आरती के बाद श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के शिखर पर नया ध्वज फहराया जाएगा. वहीं नैवेद्य कक्ष में गुड़ी आरोहण कर पूजन किया जाएगा. सुबह 10.30 बजे भोग आरती में बाबा महाकाल को केसरिया श्रीखंड और पूरनपोली का भोग लगाया जाएगा.

उज्जैन. मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में हर दिन हजारों-लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. अवंतिका नगरी का कण-कण भगवान शिव की भक्ति से जुड़ा माना जाता है, इसलिए यहां हर धार्मिक पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है. इसी परंपरा के तहत गुड़ी पड़वा पर नए संवत्सर का भव्य स्वागत किया जाएगा. 19 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर मंदिर में ध्वज चढ़ाया जाएगा. पुजारी पहले कोटितीर्थ कुंड पर सूर्य को अर्घ्य देंगे, फिर भगवान महाकाल का विशेष स्नान, पूजन और अभिषेक किया जाएगा.

उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के पुजारी महेश शर्मा के अनुसार, मंदिर में कई प्राचीन परंपराएं समय-समय पर निभाई जाती हैं. इस बार हिंदू नववर्ष की शुरुआत 19 मार्च से होने जा रही है. चैत्र मास को ऋतु परिवर्तन का समय माना जाता है, जब गर्मी की शुरुआत होती है और शरीर में वात, कफ और पित्त बढ़ सकते हैं. आयुर्वेद में नीम और मिश्री का सेवन बेहद लाभकारी माना गया है. नीम के जल से स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों में भी राहत मिलती है. इसी परंपरा के जरिए लोगों को तिथि का महत्व और स्वस्थ रहने का संदेश दिया जाता है.

सृष्टि के आरंभ का दिन है प्रतिपदा
उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के पुजारी महेश गुरु ने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि के आरंभ का पवित्र दिन माना जाता है. इस दिन से नए वर्ष की शुरुआत भी होती है. मान्यता है कि तीनों लोकों के स्वामी भगवान महाकाल के आंगन से ही हर पर्व और उत्सव की शुरुआत होती है. गुड़ी पड़वा के अवसर पर भगवान महाकाल को नीम और मिश्री से बना शरबत अर्पित किया जाएगा. पूजा के बाद यह प्रसादी श्रद्धालुओं में बांटी जाएगी. साथ ही मंदिर के शिखर पर नया ध्वज भी चढ़ाया जाएगा.

केसरिया श्रीखंड और पूरनपोली का भोग
सुबह 7.30 बजे होने वाली बालभोग आरती के बाद महाकाल मंदिर के शिखर पर नया ध्वज फहराया जाएगा. वहीं नैवेद्य कक्ष में गुड़ी आरोहण कर पूजा-अर्चना की जाएगी. सुबह 10.30 बजे भोग आरती में भगवान को केसरिया श्रीखंड और पूरनपोली का भोग लगाया जाएगा. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए पंचांग की शुरुआत होती है. मंदिर की पूजन परंपरा और तीज-त्योहार ग्वालियर के पंचांग अनुसार मनाए जाते हैं. गुड़ी पड़वा पर नए पंचांग के पूजन की भी परंपरा है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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