₹40000 से शुरू किया ये बिजनेस, पलामू की हसरत बानो देसी उत्पादों की बनीं क्वीन

पलामू: आज के समय में लोग बाजार में मिलने वाले पैक्ड खाद्य पदार्थों की जगह घरेलू और शुद्ध चीजों को ज्यादा पसंद करने लगे हैं. घर में तैयार किए गए आटा, दाल और अचार जैसे देसी उत्पाद न केवल स्वाद में बेहतर होते हैं, बल्कि उनकी शुद्धता पर भी लोगों का भरोसा ज्यादा होता है. यही वजह है कि कई लोग बाजार के सामान के बजाय घरेलू तैयार आइटम खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं. ऐसे में आज हम आपको पलामू की एक ग्रामीण महिला की आत्मनिर्भरता की मिशाल बताने वाले हैं, जो स्वंय सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बन गई हैं.

आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं हसरत बानो

पलामू जिले के खनवा गांव निवासी हसरत बानो आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी हैं. स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत की हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने की राह दिखा रही हैं. वह घर में बने शुद्ध और देसी उत्पादों के जरिए छोटा सा व्यवसाय शुरू की हैं, जो आज धीरे-धीरे उनकी पहचान बनता जा रहा है.

40000 से शुरू किया ये बिजनेस

हसरत बानो ने लोकल 18 को बताया कि स्वंय सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें शुरुआत में करीब 40 हजार रुपये की सहायता राशि मिली. इसी राशि से उन्होंने घर से ही छोटे स्तर पर देसी खाद्य उत्पाद तैयार करने का काम शुरू किया. जहां शुरुआत में उन्होंने आम का अचार, मडुआ का अचार और मक्का से जुड़े कुछ घरेलू उत्पाद बनाकर बेचना शुरू किया. धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी और उनका कारोबार भी आगे बढ़ता गया.

जानें उनकी रेसिपी

हसरत बानो ने आगे कहा कि वो कई तरह के घरेलू और शुद्ध खाद्य पदार्थ तैयार करती हैं. इनमें मडुआ का आटा, सरसों दाल, मूंग दाल, मसूर दाल समेत कई अन्य देसी उत्पाद शामिल हैं. इन सभी वस्तुओं को घर पर ही साफ-सफाई और शुद्धता के साथ तैयार करती हैं. इसकी सबसे खास बात यह है कि इन उत्पादों की पैकेजिंग भी घर पर ही की जाती है, जिससे ग्राहकों को साफ-सुथरा और सुरक्षित सामान मिलता है.

उन्होंने कहा कि वह अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार के साथ-साथ सरस मेला में भी बेचती हैं. मेले में आने वाले लोग उनके उत्पादों को काफी पसंद करते हैं. उनका कहना है कि वे हमेशा कोशिश करती हैं कि ग्राहकों को अच्छी गुणवत्ता का सामान उचित कीमत पर मिले. यही कारण है कि उनके यहां मिलने वाले अधिकांश उत्पाद 50 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराए जाते हैं, जो बाजार की तुलना में काफी सस्ते भी होते हैं.

इन वस्तुओं की होती है ज्यादा बिक्री

उन्होंने कहा कि हमारे यहां मिलने वाले उत्पाद पूरी तरह शुद्ध और घर में बने होते हैं. इसलिए लोग भरोसे के साथ उनके सामान को खरीदते हैं. खासकर मडुआ आटा और देसी अचार की मांग ज्यादा रहती है. अगर ग्रामीण महिलाएं थोड़ी हिम्मत और मेहनत करें तो घर से ही छोटा व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं. आज उनका यह छोटा प्रयास न सिर्फ उनके परिवार की आमदनी बढ़ा रहा है. बल्कि गांव में भी रोजगार और प्रेरणा का स्रोत बन रहा है.

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