कबाड़ से सजा दिया घर, ऑफिस, किसी बड़े आर्टिस्ट से कम नहीं फाइनेंस का काम करने वाले प्रकाश

Khandwa News: अक्सर लोग घर में पड़े प्लास्टिक, बोतल, कपड़े या अन्य वेस्ट मटेरियल को बेकार समझकर डस्टबिन में फेंक देते हैं. लेकिन, अगर नजरिया अलग हो तो यही बेकार चीजें खूबसूरत कलाकृतियों में बदल सकती हैं. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है खंडवा के आजाद नगर निवासी प्रकाश तंनतवार ने, जिन्होंने वेस्ट मटेरियल से अपने घर और ऑफिस को सजाकर महल जैसा रूप दे दिया है. प्रकाश तंनतवार पेशे से बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़े हैं, लेकिन उन्हें बचपन से ही टूटी-फूटी चीजों से कलाकारी करने का शौक रहा है. आज उनके घर और छोटे से ऑफिस में जगह-जगह वेस्ट मटेरियल से बने सजावटी आइटम देखने को मिलते हैं.

बोतल, नारियल और पत्थरों की कलाकृतियां
प्रकाश ने नारियल के छिलकों से ब्रश, प्लास्टिक की बोतलों से झूमर और कई सजावटी चीजें तैयार की हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने पत्थरों से एक छोटा सा मंदिर भी बनाया है. ये पत्थर वे जम्मू-कश्मीर के वैष्णो देवी धाम से लाए थे, जिनसे उन्होंने माता का छोटा सा दरबार तैयार कर दिया.

बेटी ने भी सीखी कला
प्रकाश की यह कला अब उनके परिवार तक भी पहुंच चुकी है. उनकी बेटी भी पिता को देखकर वेस्ट चीजों से नई-नई चीजें बनाना सीख गई है. परिवार में पत्नी व बेटी उनके साथ रहती हैं, जबकि उनके एक भाई डॉक्टर और दूसरे भाई डीएसपी हैं. एक भाई प्राइवेट जॉब कर रहे हैं.

बचपन से था शौक
Local 18 से बातचीत में प्रकाश तंनतवार बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही वेस्ट चीजों से कुछ नया बनाने का शौक था. जब भी उन्हें खाली बोतल या टूटी चीज मिलती थी, वे उसे काटकर उससे कुछ नया बनाने की कोशिश करते थे. धीरे-धीरे यह उनका शौक बन गया. उनका कहना है कि जहां लोग बेकार चीजें देखते हैं, वहीं उन्हें उनमें नई कलाकृति बनाने का मौका दिखाई देता है.

कम खर्च में बन जाते हैं महंगे आइटम
प्रकाश बताते हैं कि बाजार में जो सजावटी सामान हजारों रुपये में बिकते हैं. वे कई बार घर के वेस्ट मटेरियल से बहुत कम खर्च में तैयार किए जा सकते हैं. उन्होंने लकड़ी और वेस्ट मटेरियल से एक छोटा जहाज भी बनाया है, जिसकी लागत करीब 200 रुपये आई है, जबकि बाजार में ऐसा जहाज 3 से 4 हजार रुपये में मिलता है.

अखबार से बनाई सस्ती क्ले
प्रकाश कागज की लुगदी यानी अखबार से बनी क्ले का भी इस्तेमाल करते हैं, जो बहुत सस्ती होती है और इससे कई तरह की कलाकृतियां बनाई जा सकती हैं. इसके अलावा उन्होंने कपड़ों, प्लास्टिक और माचिस की तीलियों से भी कई सजावटी चीजें तैयार की हैं.

पक्षियों के लिए भी किया इंतजाम
उन्होंने प्लास्टिक की बोतलों से पानी के छोटे-छोटे सकोरे भी बना दिए हैं, ताकि पक्षी उनमें पानी पी सकें. उनका कहना है कि बोतलों को फेंकने की बजाय उन्हें रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है.

बच्चों को रोकें नहीं
प्रकाश का कहना है कि अगर बच्चे रंगों या टूटी-फूटी चीजों से कुछ बनाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें रोकना नहीं चाहिए. अगर बच्चों का दिमाग क्रिएटिव है तो उन्हें नई चीजें बनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए.उनका मानना है कि थोड़ी कल्पना और मेहनत से वेस्ट मटेरियल को भी बेस्ट कलाकृति में बदला जा सकता है, बस नजरिया अलग होना चाहिए.

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