टियर-2 और टियर-3 शहरों में रियल एस्टेट में तेजी, फ्लैट और प्लॉट की कीमतों में जोरदार उछाल; जाने

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Property Price Increase: देश के रियल एस्टेट बाजार में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. मेट्रो शहरों में बढ़ती कीमतों के बीच निवेशक और होमबायर्स तेजी से टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर रुख कर रहे हैं.

प्रॉपटेक कंपनी स्क्वायर यार्ड्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास के कारण आने वाले 2 से 4 वर्षों में इन शहरों में जमीन और प्लॉट की कीमतें 25 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं. आइए जानते हैं, रिपोर्ट के विषय में…..

इन शहरों में तेजी से बढ़ रही मांग

रिपोर्ट के अनुसार इंदौर, जयपुर, भोपाल, नागपुर, चंडीगढ़, मोहाली,लखनऊ, रायपुर, लुधियाना, पटना, रांची, जालंधर और उदयपुर जैसे शहरों में पिछले कुछ वर्षों में जमीन और प्लॉट की मांग तेजी से बढ़ी है.

फ्लैट और प्लॉट की कीमतों में बढ़ोतरी का रुझान

पिछले कुछ सालों में कई शहरों में रियल एस्टेट की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिली है. हालांकि प्लॉट के दाम फ्लैट की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़े हैं. उदाहरण के तौर पर, इंदौर में फ्लैट की कीमतों में लगभग 72 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. जबकि प्लॉट के दाम 85 से 100 फीसदी तक उछल गए हैं.

जयपुर में भी फ्लैट की कीमतें 65 फीसदी तक उछली है, लेकिन प्लॉट की कीमतों में 75 से 90 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली है. वहीं, चंडीगढ़ में फ्लैट के दाम लगभग 44 प्रतिशत बढ़े हैं. यह रुझान बताता है कि निवेशक अब खाली प्लॉट में अधिक दिलचस्पी ले रहे हैं और इसकी कीमतों में तेजी लगातार जारी है.

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जमीन की कीमतों में उछाल

रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के आस-पास जमीन की कीमतों में तेजी देखी जा रही है. इसके पीछे मुख्य कारण तेजी से हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास है.

देशभर में नए एक्सप्रेसवे, रिंग रोड, मेट्रो नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स पार्क और एयरपोर्ट परियोजनाएं छोटे शहरों की कनेक्टिविटी को बेहतर बना रही हैं. जिससे इन क्षेत्रों में निवेश की मांग बढ़ रही है और जमीन की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं.

क्या कहते है टियर-2 और टियर-3 शहरों से जुड़े डेवलपर्स?

ग्रीनलैंड्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर और सीईओ नितिन श्रीवास्तव ने कहा टियर-2 और टियर-3 शहरों में डेवलपर्स के लिए भी बड़ी संभावनाएं बन रही हैं. इन शहरों में जमीन की उपलब्धता ज्यादा है और कीमतें अभी भी मेट्रो शहरों के मुकाबले काफी किफायती हैं.

यही वजह है कि अब कई डेवलपर्स प्लॉटेड डेवलपमेंट, टाउनशिप और मिड-सेगमेंट हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रहे हैं. 

वन ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर उदित जैन ने कहा पिछले कुछ वर्षों में टियर-2 और टियर-3 शहरों में रियल एस्टेट बाजार ने काफी मजबूत ग्रोथ दिखाई है. बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, नए एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास से इन शहरों की कनेक्टिविटी तेजी से बेहतर हुई है. इसका सीधा असर प्रॉपर्टी की मांग पर पड़ा है. 

बड़े शहरों से बाहर बढ़ रहा निवेश

अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल ने कहा छोटे शहरों में रियल एस्टेट की तेजी का सबसे बड़ा कारण आर्थिक गतिविधियों का बढ़ना है. कई राज्यों में नए इंडस्ट्रियल क्लस्टर, मैन्युफैक्चरिंग हब और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किए जा रहे हैं. जिससे रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं. जैसे-जैसे रोजगार बढ़ेगा, वैसे-वैसे आवासीय प्रॉपर्टी की मांग भी बढ़ेगी. 

सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का ने कहा, टियर-2 और टियर-3 शहर अब केवल स्थानीय खरीदारों तक सीमित नहीं रह गए हैं. अब बड़े शहरों में रहने वाले लोग भी निवेश के उद्देश्य से इन बाजारों में रुचि दिखा रहे हैं.

कई निवेशक ऐसे क्षेत्रों में प्लॉट खरीद रहे हैं जहां भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं विकसित होने की संभावना है. 

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