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Success Story: झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली 12वीं की छात्रा गुरलीन कम उम्र में ही आत्मनिर्भर बनने की मिसाल पेश कर रही हैं. उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ लाह से इयररिंग्स, डिजाइनर नेम प्लेट, चाबी रिंग और ब्रेसलेट बनाने का छोटा सा बिजनेस शुरू किया है. खास बात यह है कि गुरलीन ने इसकी कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली, बल्कि यूट्यूब से वीडियो देखकर इस कला को सीखा और लगातार अभ्यास के जरिए अपने डिजाइन को बेहतर बनाया. आज उनके इंस्टाग्राम पेज के जरिए रांची ही नहीं, बल्कि झारखंड के कई जिलों से ऑर्डर मिल रहे हैं और वे पूरे भारत में अपने प्रोडक्ट की डिलीवरी कर रही हैं. इतनी कम उम्र में अपने हुनर के दम पर कमाई कर गुरलीन अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं. रिपोर्ट- शिखा श्रेया
झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली गुरलीन क्लास 12वीं में पढ़ाई करती हैं. उन्होंने क्लास 11 से ही बिजनेस शुरू कर दिया था. दरअसल, वह लाह की चूड़ियां नहीं, बल्कि इयररिंग्स ( झुमके/बालियां ) बनाने का काम करती हैं.
वह एक से बढ़कर एक इयररिंग्स बनाती हैं. इसके अलावा वह डिजाइनर नेम प्लेट, डिजाइनर चाबी रिंग, डिजाइनर ब्रेसलेट सहित कई सारी चीज बनाने का काम करती हैं. गुरलीन का खुद का ऑनलाइन इनका पेज है. जहां से उनको अच्छे खासे डेली ऑर्डर आते हैं.
गुरलिन बताती हैं कि मुझे अपने पॉकेट मनी और स्कूल फीस के लिए अपने माता-पिता पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. मैं इसी को बेचकर अपना सारा खर्चा निकाल लेती हूं. ऐसा नहीं है की माता-पिता नहीं दे सकते हैं. वह बिल्कुल दे सकते हैं, लेकिन मुझे हमेशा से खुद का कुछ करना था. मैंने दूसरी लड़कियों को देखा है अपने पैरों पर खड़ा होते हुए. ऐसे मुझे लगा कि मुझे भी अपनी स्किल को डेवलप करना है और अभी से ही अगर आगे कुछ करना है तो अभी से हा लग जाना है.
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अक्सर आपने लाह की चूड़ियां या फिर खूबसूरत नेम प्लेट ही देखे होंगे, लेकिन गुरलीन ने बड़ी ही खूबसूरती के साथ इयररिंग्स बना दिया है, जिसको आप कस्टमाइज कर सकते हैं. मतलब उस इयररिंग्स पर भी आप अपना नाम लिखवा सकते हैं. यह दिखने में भी बड़ा ही खूबसूरत और यूनिक लगता है. गुलीन बताती हैं कि यह सब इयररिंग्स वह अपने हाथों से बनाती हैं. इसको मेल्ट करके फिर उसको धूप में सुखाकर कई सारे प्रोसेस के बाद यह तैयार होता है.
गुरलीन ने आगे बताया कि वह कहीं से कोई फॉर्मल ट्रेनिंग इसकी नहीं ली हैं. बल्कि वह यूट्यूब से वीडियो देखते हैं. वह ऑनलाइन देखकर बनाती हैं. कई बार बिगड़ जाता है, लेकिन वह बार-बार बनाती हैं. कई बार बनाने के क्रम में आखिरकार लास्ट में एकदम परफेक्ट बन गया. आज उनके हाथ में स्मार्टफोन है तो इसको उन्होंने बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया, सिर्फ रील देखने के लिए नहीं.
गुरलीन ने बताया कि यूट्यूब से कुछ दिन में उन्होंने सीख लिया. इसके बाद खुद का इतना सारा आइटम बनाना शुरू कर दिया. आज उनके पास फोन के लाह कवर भी हैं, जो कि दिखने में काफी यूनिक लगते हैं और उनके पास जितने भी आइटम हैं. वह सब कस्टमाइज हो सकते हैं. यानी कि आपके मुताबिक आपका नाम, आपका मन मुताबिक डिजाइन हो जाएगा. वह सारी चीज तुरंत कर देती हैं.
गुरलीन ने बताया कि आज उनका इंस्टाग्राम पर पेज बना हुआ है. जहां से उन्हें रांची के अलग-अलग इलाकों और झारखंड के कई जिलों जैसे गुमला, जमशेदपुर, धनबाद व बोकारो तक से आर्डर आते हैं. वह ऑनलाइन पूरे भारत में डिलीवरी करती हैं. इतनी कम उम्र में वह खुद के पैरों पर खड़ा रहना काफी अच्छा महसूस कर रही हैं. वह आगे इसी बिजनेस को और बढ़ाना चाहती हैं.
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