Social Media Ban in UK: ब्रिटेन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेकर सख्ती बढ़ती जा रही है. देश के मीडिया और डेटा प्राइवेसी रेगुलेटर्स ने बड़ी टेक कंपनियों से कहा है कि वे बच्चों को अपने प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए ज्यादा मजबूत कदम उठाएं. रेगुलेटर्स का कहना है कि कई कंपनियां अपनी ही तय न्यूनतम उम्र की शर्तों को ठीक से लागू नहीं कर रही हैं. सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने से रोका जाए. यह कदम ऑस्ट्रेलिया में उठाए गए फैसलों की तरह हो सकता है.
एल्गोरिदम से बच्चों पर पड़ रहा असर
रेगुलेटरी संस्थाओं का कहना है कि उन्हें सोशल मीडिया के एल्गोरिदम को लेकर खास चिंता है. इन एल्गोरिदम के जरिए बच्चों को ऐसा कंटेंट दिख सकता है जो उनके लिए नुकसानदेह या लत लगाने वाला हो सकता है.
ब्रिटेन की संचार नियामक संस्था Ofcom की प्रमुख Melanie Dawes ने कहा कि ये प्लेटफॉर्म घर-घर में पहचाने जाते हैं लेकिन इनके डिजाइन में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कंपनियों ने जल्दी सुधार नहीं किया तो रेगुलेटरी कार्रवाई कर सकते हैं.
कंपनियों को दिए गए सख्त निर्देश
ब्रिटेन के ऑनलाइन सेफ्टी कानून के तहत अब कई कंपनियों को अपने नियम मजबूत करने के लिए कहा गया है. इसमें Meta के प्लेटफॉर्म Facebook और Instagram, साथ ही TikTok, Snapchat, YouTube और Roblox शामिल हैं. इन कंपनियों से कहा गया है कि वे 30 अप्रैल तक यह स्पष्ट करें कि वे उम्र की जांच को कैसे मजबूत बनाएंगी, बच्चों से अनजान लोगों के संपर्क को कैसे सीमित करेंगी और अपने प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले कंटेंट को कैसे सुरक्षित बनाएंगी. साथ ही नाबालिगों पर नए फीचर्स का परीक्षण रोकने के लिए भी कहा गया है.
आधुनिक तकनीक से उम्र की पहचान करने की मांग
ब्रिटेन की डेटा प्राइवेसी संस्था Information Commissioner’s Office ने भी इन प्लेटफॉर्म्स को एक खुला पत्र जारी किया है. इसमें कहा गया है कि कंपनियों को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके उम्र की सही पहचान सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि 13 साल से कम उम्र के बच्चे उन सेवाओं तक न पहुंच सकें जो उनके लिए नहीं बनाई गई हैं. संस्था के प्रमुख Paul Arnold ने कहा कि आज के समय में उम्र की पुष्टि करने के लिए कई तकनीकी विकल्प मौजूद हैं इसलिए कंपनियों के पास अब कोई बहाना नहीं होना चाहिए.
कंपनियों का क्या कहना है
Meta के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी पहले से ही AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है जो यूजर्स की उम्र का अनुमान लगाकर किशोरों के लिए सुरक्षित अकाउंट सेटिंग्स लागू करता है. कंपनी का यह भी कहना है कि उम्र की पुष्टि ऐप स्टोर स्तर पर होनी चाहिए ताकि परिवारों को बार-बार निजी जानकारी साझा न करनी पड़े.
वहीं Google के स्वामित्व वाले YouTube ने कहा कि प्लेटफॉर्म पहले से ही अलग-अलग उम्र के लिए उपयुक्त अनुभव प्रदान करता है और रेगुलेटरों को उन सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए जो नियमों का पालन नहीं कर रही हैं.
नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना संभव
ब्रिटेन के नियमों के अनुसार यदि कंपनियां बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन नहीं करती हैं तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. Ofcom कंपनियों पर उनके वैश्विक राजस्व का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगा सकता है जबकि Information Commissioner’s Office भी सालाना वैश्विक आय का 4 प्रतिशत तक दंड लगा सकता है.
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