एक ईमेल जिसका जवाब न मिले, वो किसी का दिन खराब कर सकता है, लेकिन अगर बार-बार 200 ईमेल भेजे जाएं, और उनमें से एक का भी जवाब न मिले तो क्या होगा? ज्यादातर लोग हार मान लेंगे, लेकिन जर्मनी के तीन भाइयों ने इसे दुनिया के सबसे बड़े बिजनेस रिवेंज में बदल दिया. उन्होंने सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनी ईबे (eBay) को बार-बार पार्टनरशिप के लिए मैसेज किए, मिन्नतें कीं, लेकिन वहां से रिप्लाई नहीं मिला. इसके बाद जो हुआ उसने पूरी दुनिया के टेक मार्केट को हिला दिया. उन्होंने ईबे को ही कॉपी किया, उसकी नाक के नीचे अपना साम्राज्य खड़ा किया और अंत में उसी कंपनी को मजबूर कर दिया कि वो करोड़ों डॉलर देकर उनका बिजनेस खरीदे. यह कहानी है मार्क, ओलिवर और अलेक्जेंडर सामवर की, जिन्हें आज दुनिया ‘कॉपीकैट बिलियनेयर्स’ के नाम से जानती है.
साल 1999 के आसपास का समय था. अमेरिका में ईबे नाम की कंपनी धूम मचा रही थी. लोग अपने पुराने सामान की नीलामी कर रहे थे और इंटरनेट पर खरीद-फरोख्त का एक नया दौर शुरू हो चुका था. जर्मनी में बैठे सामवर भाइयों ने देखा कि यह मॉडल जबरदस्त है, लेकिन जर्मनी में अभी तक ऐसा कुछ नहीं था. उन्होंने सोचा कि क्यों न ईबे के साथ हाथ मिलाया जाए. उन्होंने ईबे के हेडक्वार्टर में एक के बाद एक 200 ईमेल भेजे. वो बस इतना चाहते थे कि ईबे उन्हें जर्मनी में अपना काम संभालने का मौका दे. लेकिन ईबे को लगा कि जर्मनी का मार्केट अभी तैयार नहीं है, या शायद उन्हें इन तीन भाइयों पर भरोसा नहीं था. उन्होंने एक भी ईमेल का जवाब देना जरूरी नहीं समझा.
ईबे की कॉपी अलैंडो
अपने किसी भी ईमेल का उत्तर न पाकर अलेक्जेंडर, मार्क और ओलिवर ने तय किया कि अगर ईबे उन्हें साथ नहीं लेना चाहता, तो वो ईबे को टक्कर देंगे. उन्होंने रातों-रात अपनी खुद की ऑक्शन साइट अलैंडो (Alando) शुरू कर दी. यह दिखने में बिल्कुल ईबे जैसी थी, इसका काम करने का तरीका ईबे जैसा था और यहां तक कि इसका लोगो भी ईबे से मिलता-जुलता था. तीनों ने बहुत तेजी से काम किया. महज 100 दिनों के अंदर अलैंडो जर्मनी की सबसे बड़ी नीलामी वेबसाइट बन गई. अब पासा पलट चुका था. ईबे, जिसने कभी इन भाइयों के ईमेल नजरअंदाज किए थे, घबरा गया. उन्हें लगा कि अगर वो जर्मनी के मार्केट में घुसना चाहते हैं तो उन्हें अलैंडो को रास्ते से हटाना होगा. अंत में, ईबे ने अलैंडो को 43 मिलियन डॉलर में खरीद लिया. जिस कंपनी ने नौकरी नहीं दी, उसी ने सिर्फ तीन महीने पुराने स्टार्टअप के लिए करोड़ों रुपये चुकाए.
हिट स्टार्टअप की नकल ही था बिजनेस
लेकिन यह तो बस शुरुआत थी. सामवर भाइयों को समझ आ गया था कि उन्हें नया आइडिया सोचने की जरूरत नहीं है. बस सफल आइडिया को कॉपी करना है. इसके बाद उन्होंने ‘रॉकेट इंटरनेट’ नाम की कंपनी बनाई. इस कंपनी का काम था कि अमेरिका में कोई भी हिट स्टार्टअप देखो, उसकी नकल बनाओ और उसे उन देशों में लॉन्च कर दो, जहां असली कंपनी अभी तक नहीं पहुंची है. जब असली कंपनी वहां एक्सपेंशन करने की सोचती, तो उसे पहले से ही मार्केट पर कब्जा जमाए बैठे सामवर ब्रदर्स का मुकाबला करना पड़ता. हार मानकर वो कंपनियां करोड़ों डॉलर देकर सामवर भाइयों का बिजनेस खरीद लेती थीं.
सिलिकॉन वैली वाले करने लगे थे नफरत!
उन्होंने यही खेल फेसबुक के साथ भी खेला. जब फेसबुक अमेरिका में बढ़ रहा था, उन्होंने जर्मनी में स्टडीवीजेड (StudiVZ) नाम की साइट बनाई जो, दिखने में हूबहू फेसबुक जैसी थी. बाद में उसे भी भारी मुनाफे में बेचा गया. इसके बाद उन्होंने ग्रुपॉन (Groupon) की नकल की और सिटीडील (CityDeal) बनाया. महज पांच महीनों के भीतर ग्रुपॉन ने मजबूर होकर सिटीडील को करीब 170 मिलियन डॉलर में खरीदा. उनका बिजनेस मॉडल इतना सटीक था कि सिलिकॉन वैली के बड़े-बड़े निवेशक और बिजनेसमैन उनसे नफरत करने लगे थे. उन्हें ‘कॉपीकैट’ कहा जाने लगा, उन पर आरोप लगे कि वो दूसरों की मेहनत और इनोवेशन को चुरा रहे हैं.
कॉपी करने में कोई शर्म नहीं
सामवर भाइयों को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ा. ओलिवर सामवर अक्सर कहते थे कि वो “आर्टिस्ट” नहीं हैं बल्कि “बिल्डर” हैं. उन्हें इस बात में कोई शर्म नहीं थी कि वो नकल कर रहे हैं. उनके ऑफिस में काम करने का माहौल बेहद सख्त था. वो अपने कर्मचारियों से दिन-रात काम कराते थे, ताकि असली कंपनी के पहुंचने से पहले वो मार्केट पर कब्जा कर सकें. रॉकेट इंटरनेट ने जालांडो (Zalando), हेलोफ्रेश (HelloFresh) और भारत में जबोंग (Jabong) जैसे कई बड़े ब्रांड्स को खड़ा करने में मदद की.
हालांकि, उनकी इस रणनीति ने उन्हें बहुत अमीर बना दिया, लेकिन वो टेक जगत के सबसे विवादित चेहरे बन गए. कई लोगों का मानना था कि उनकी वजह से असली इनोवेशन रुक रहा है, क्योंकि स्टार्टअप्स नए आइडिया लाने के बजाय सिर्फ पुराने आइडिया को कॉपी करने में लग गए थे. लेकिन बिजनेस की दुनिया में आंकड़े बोलते हैं. आज ये तीनों भाई अरबपति हैं और उनकी कंपनी रॉकेट इंटरनेट ने दुनिया भर के सैकड़ों स्टार्टअप्स में निवेश किया है.
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