MSP से कम पर नहीं बिकेगी सरसों, MP में किसानों को फायदा, भावांतर योजना मंजूर

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मध्य प्रदेश में सरसों की खेती करने वाले किसानों को अब अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर बेचने की मजबूरी नहीं होगी. केंद्र सरकार ने सरसों को भावांतर योजना में शामिल करने की मंजूरी दे दी है. इससे बाजार भाव कम होने पर सरकार अंतर की राशि किसानों को देगी. ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सहित कई जिलों के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.

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भोपाल.  मध्य प्रदेश के सरसों उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है. अब उन्हें अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर बेचने की मजबूरी नहीं होगी. केंद्र सरकार ने सरसों को भावांतर योजना में शामिल करने की मंजूरी दे दी है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में हुई बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी. बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल सहित केंद्र और राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. इस फैसले के बाद बाजार में यदि सरसों का भाव MSP से नीचे जाता है तो सरकार किसानों को अंतर की राशि देगी. इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ ही फसल के उचित दाम सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है. इसी संदर्भ में यह निर्णय किसानों के हित में बड़ा माना जा रहा है. बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भावांतर योजना के अंतर्गत होने वाले भुगतान को तेज करने के निर्देश भी दिए. साथ ही उन्होंने तुअर यानी अरहर की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद का भरोसा भी दिया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है. सरसों को भावांतर योजना में शामिल करने से हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी.

सरसों के MSP और बाजार भाव का अंतर
सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस समय लगभग 6200 रुपये प्रति क्विंटल तय है. हालांकि कई मंडियों में इसका बाजार भाव करीब 6000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है. ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 200 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ता है. भावांतर योजना के लागू होने के बाद यह अंतर सरकार किसानों को देगी. इससे किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों में बेचने की स्थिति से राहत मिलेगी.दति

दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने की रणनीति
बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को दलहन और तिलहन उत्पादन का अग्रणी राज्य बनाने पर जोर दिया. केंद्र और राज्य की संयुक्त टीम द्वारा मूंग, उड़द, चना, तिल, सरसों और पाम ऑयल जैसी फसलों के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी. इसके अलावा मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, ग्रामीण सड़क योजना और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े कई मुद्दों की समीक्षा भी की गई.

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ
मध्य प्रदेश में सरसों की खेती का बड़ा हिस्सा ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में होता है. ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया और शिवपुरी जिले इसके प्रमुख उत्पादक हैं. इन जिलों के किसानों को भावांतर योजना का सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है. फसल आने के बाद अक्सर बाजार में सरसों का भाव MSP से नीचे चला जाता है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. नई व्यवस्था से यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है.

प्रक्रिया भी शुरू, 20 मार्च तक पंजीयन
सरकार ने सरसों की फसल को पहली बार भावांतर योजना में शामिल किया है. इसके लिए किसानों का पंजीयन भी शुरू हो चुका है. कई जिलों में सहकारी समितियों के माध्यम से पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं. किसान ई-उपार्जन पोर्टल पर अपना पंजीयन करा सकते हैं. बताया गया है कि किसान 20 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं. इसी प्रक्रिया के तहत चने की फसल को भी समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए किसान पंजीयन कर सकते हैं.

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Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें

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