दूध पीने का ये तरीका है बेहद खतरनाक, बन सकता है पेट की टीबी की वजह, एक्सपर्ट से जानें

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Raw Milk Health Risks: अगर आप भी बॉडी बनाने या वजन बढ़ाने के चक्कर में सुबह-सुबह कच्चा दूध और अंडा गटक लेते हैं, तो संभल जाइए. यह आदत आपको सेहतमंद बनाने के बजाय सीधे अस्पताल पहुंचा सकती है. डॉक्टरों ने खुलासा किया है कि कच्चे दूध के सेवन से पेट की टीबी जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है.

देहरादून: दूध को सेहत के लिए सुपरफूड माना जाता है क्योंकि इसमें शरीर के लिए जरूरी लगभग सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे पीने का गलत तरीका आपको फायदे की जगह बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है. आजकल कई लोग, खासकर युवा, वजन बढ़ाने के लिए कच्चे दूध में अंडा मिलाकर पीना पसंद करते हैं. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे बेहद खतरनाक बताया है. बिना उबला दूध पीने से न केवल पेट खराब होता है, बल्कि यह पेट की टीबी जैसी गंभीर और लाइलाज दिखने वाली बीमारियों का कारण भी बन सकता है.

कच्चे दूध से बढ़ता है पेट की टीबी का खतरा
कच्चे दूध से होने वाली सबसे डरावनी बीमारी है ‘पेट की टीबी’ (Gastrointestinal Tuberculosis). देहरादून के टीबी एवं छाती विशेषज्ञ डॉ. अनुराग अग्रवाल बताते हैं कि इंसानों की तरह गाय-भैंसों को भी टीबी हो सकती है. अगर किसी संक्रमित मवेशी का दूध बिना उबाले पी लिया जाए, तो उसमें मौजूद ‘माइकोबैक्टीरियम बोविस’ जैसे कीटाणु सीधे इंसान की आंतों पर हमला कर देते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी कई लोग सीधे मवेशी से दूध निकालकर उसे कच्चा ही पी लेते हैं, जो इस बीमारी को दावत देने जैसा है.

फूड पॉइजनिंग और बैक्टीरिया का हमला
बिना उबले दूध में सिर्फ टीबी ही नहीं, बल्कि साल्मोनेला, ई. कोली और लिस्टेरिया जैसे खतरनाक बैक्टीरिया भी होते हैं. ये बैक्टीरिया पेट में जाकर तेज ऐंठन, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग पैदा करते हैं. अगर किसी व्यक्ति की इम्यूनिटी कम है, तो ये कीटाणु खून के जरिए शरीर के दूसरे अंगों को भी अपनी चपेट में ले सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि कच्चा अंडा और कच्चा दूध एक साथ लेना पाचन तंत्र और लिवर पर बहुत ज्यादा दबाव डालता है, जिससे शरीर धीरे-धीरे अंदर से कमजोर होने लगता है.
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दूध को उबालना है जरूरी
डॉक्टरों के मुताबिक, दूध पीने का सबसे सुरक्षित तरीका उसे अच्छी तरह उबालकर ही इस्तेमाल करना है. दूध को उबालने से उसमें मौजूद सभी हानिकारक रोगाणु नष्ट हो जाते हैं और वह पीने लायक सुरक्षित हो जाता है. डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि अगर किसी को पेट की टीबी हो भी जाए, तो डरने की जरूरत नहीं है. फेफड़ों की टीबी की तरह इसका इलाज भी संभव है. समय पर पता चलने पर 6 से 12 महीने के कोर्स से यह पूरी तरह ठीक हो सकती है. लेकिन समझदारी इसी में है कि दूध को हमेशा गर्म करके या गुनगुना करके ही पिएं.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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