Summer Special: राजा-महाराजा भी गर्मी से बचते थे इन नुस्खों से, 5 स्टार AC फेल!

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गर्मियों का मौसम तेजी से बढ़ रहा है और तापमान कई जगहों पर 40 डिग्री तक पहुंच चुका है. ऐसे में शरीर को ठंडक और ऊर्जा बनाए रखना बहुत जरूरी है. पारंपरिक आयुर्वेदिक नुस्खे जैसे गोंद कतिरा, बावची और धागे वाली मिश्री सदियों से गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखने, कमजोरी दूर करने और इम्यूनिटी मजबूत बनाने के लिए इस्तेमाल होते रहे हैं.

गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और इस मार्च के महीने में तापमान कई जगहों पर 40 डिग्री तक पहुंच चुका है. कई जिलों में हीटवेव जैसी स्थिति बनी हुई है, जिससे लोगों की हालत बेहद परेशान है. लोग गर्मी से बचने के लिए कोल्डड्रिंक, जूस और अन्य पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन इनसे भी ज्यादा फायदेमंद हैं पारंपरिक और प्राकृतिक नुस्खे. राजा-महाराजा और हमारे बुजुर्ग सदियों से गर्मी से राहत पाने के लिए प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और घरेलू उपायों का इस्तेमाल करते रहे हैं.

पारंपरिक नुस्खों में गोंद कतिरा, बावची और धागे वाली मिश्री का विशेष इस्तेमाल किया जाता था. आयुर्वेद में इन्हें शरीर को ताकत देने, ठंडक पहुंचाने और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने वाला माना गया है. नियमित और संतुलित मात्रा में इनका सेवन करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और गर्मी के मौसम में होने वाली थकान व कमजोरी से राहत मिलती है. इन तीनों चीजों का सेवन करने का तरीका भी बेहद आसान और पारंपरिक है.

आमतौर पर रात के समय एक गिलास साफ पानी में समान मात्रा में गोंद कतिरा, बावची और धागे वाली मिश्री डालकर भिगो दिया जाता है. रात भर भिगोने से ये चीजें अच्छी तरह फूल जाती हैं और उनके पोषक तत्व पानी में घुल जाते हैं. सुबह खाली पेट इस मिश्रण का सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है. कई लोग इसे गर्मियों में प्राकृतिक टॉनिक की तरह भी इस्तेमाल करते हैं. गोंद कतिरा गर्मियों में बेहद उपयोगी प्राकृतिक पदार्थ माना जाता है. यह कुछ विशेष पेड़ों से निकलने वाला प्राकृतिक गोंद होता है, जो पानी में भिगोने पर फूलकर जेली जैसा बन जाता है.

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आयुर्वेदिक डॉक्टर नरेंद्र कुमार के अनुसार, गोंद कतिरा का सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है और लू, अत्यधिक गर्मी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचाव हो सकता है. गर्मियों में अधिक पसीना आने के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है, ऐसे में गोंद कतिरा शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इसके साथ ही यह कमजोरी, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याओं को कम करने में भी सहायक माना जाता है. गोंद कतिरा सिर्फ शरीर को ठंडक ही नहीं देता, बल्कि त्वचा और बालों के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है.

गोंद कतिरा के सेवन से त्वचा को अंदर से नमी मिलती है, जिससे गर्मियों में होने वाला रूखापन और जलन कम हो सकती है. यह शरीर की गर्मी को संतुलित रखने में मदद करता है, जिससे त्वचा पर दाने या घमौरियां होने की संभावना भी घट जाती है. इसके अलावा कई लोग बालों को मजबूत बनाने और सिर की त्वचा को ठंडक देने के लिए भी इसका उपयोग करते हैं, जिससे बालों की सेहत बेहतर बनी रहती है.

इसी तरह, बावची को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधीय पौधे के रूप में जाना जाता है. इसके पत्ते, जड़, फूल और बीज सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं, लेकिन अधिकतर उपचारों में इसके बीज का उपयोग किया जाता है. इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लामेटरी, एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-बैक्टीरियल जैसे गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में सहायक हो सकते हैं. आयुर्वेद के अनुसार, बावची का सेवन करने से शरीर की ताकत बढ़ती है, इम्यूनिटी मजबूत होती है और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करने लगता है.

धागे वाली मिश्री भी आयुर्वेद में काफी उपयोगी मानी जाती है और इसे प्राकृतिक मिठास का बेहतर स्रोत माना जाता है. यह आम चीनी की तुलना में कम प्रोसेस्ड होती है और सीमित मात्रा में सेवन करने पर शरीर को ऊर्जा देने में मदद करती है. इसमें कार्बोहाइड्रेट, आयरन और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की कमजोरी दूर करने में सहायक हो सकते हैं. पारंपरिक रूप से माना जाता है कि धागे वाली मिश्री पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, तनाव कम करने और शरीर को हल्की ठंडक देने में मदद करती है, इसलिए इसे कई घरेलू नुस्खों में शामिल किया जाता है.

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