होली के बाद पहले मंगलवार को अयोध्या में बुढ़वा मंगल का आयोजन, जानें इस खास परंपर का महत्व?

Budhwa Mela in Ayodhya: होली के बाद पहले मंगलवार को राम की अयोध्यानगरी में आस्था, परंपरा और श्रद्धा का खास त्योहार बुढ़वा मंगल बड़े ही धूमधाम तरीके से मनाया जा रहा है. इस मौके पर अयोध्या में हजारों की संख्या में श्रद्धालु रामनगरी की कोतवाल माने जाने वाले मत गजेंद्र के दर्शन करते हैं और खास-पूजा अर्चना करते हैं.

सालों पुरानी इस परंपरा को आज भी काफी उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है. बुढ़वा मंगल के अवसर पर अयोध्या में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिल रहा है और दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं. 

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कोतवाल मत गजेंद्र की खास पूजा-अर्चना

बुढ़वा मंगल के दिन रामनगरी के दक्षिण द्वार पर स्थित मत गजेंद्र मंदिर में खास पूजा-अर्चना की जाती है. श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन करते हैं और परिवार की खुशहाली के लिए श्रीराम भगवान से कामना करते हैं.

इस दिन मंदिर परिसर में भारी भीड़ भी देखने को मिलती है. भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगातार कोतवाल मत गजेंद्र के दर्शन करते हैं. 

रामायण काल से जुड़ी है धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जब भगवान श्रीराम लंका पर विजय के बाद अयोध्या लौटे थे, तब उन्होंने विभीषण के पुत्र मत गजेंद्र को अयोध्या के दक्षिण द्वार पर स्थापित किया था. माना जाता है कि उसी समय से मत गजेंद्र को रामनगरी का कोतवाल कहा जाता है.

तभी से यहां उनकी पूजा-अर्चना की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसे आज भी श्रद्धालु पुरी आस्था के साथ निभाते हैं. 

बिना दर्शन के अधूरी मानी जाती है तीर्थ यात्रा

स्थानीय लोगों के मुताबिक, अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की तीर्थ यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती है, जब तक वे कोतवाल मत गजेंद्र के दर्शन नहीं कर लेते हैं. इसी कारण से बुढ़वा मंगल के दिन यहां खास तौर से भक्तों की भीड़ उमड़ती है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. 

संत-महंत भी करते हैं दर्शन

परंपराओं के अनुसार इस दिन हनुमानगढ़ी के प्रमुख संत और महंत भी मत गजेंद्र के मंदिर पहुंचकर उनके दर्शन-पूजन करती है. इसके साथ ही भगवान श्रीराम की तरफ से कोतवाल मत गजेंद्र को खास भोग प्रसाद अर्पित किया जाता है. यह परंपरा अयोध्या की धार्मिक संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है. 

मेले जैसा माहौल, श्रद्धालुओं की भारी भीड़

बुढ़वा मंगल के मौके पर मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में मेले जैसा माहौल देखने को मिलता है. सैकड़ों सालों से चली आ रही यह परंपरा आज भी अयोध्या में पूरे हर्षोउल्लास और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है.

इस दिन हजारों श्रद्धालु कोतवाल मत गजेंद्र के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपनी मन की बातें उनके समक्ष रखते हैं. 

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