ATM हैं खीरे की ये 2 किस्म! 45 दिन में तैयार, किसान हो जाएंगे मालामाल

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Agriculture News: खीरे की फसल में हर 2-3 दिन में तुड़ाई करनी पड़ती है, जिससे लगातार मार्केट में सप्लाई बनी रहती है. गर्मियों में जब तापमान 40 डिग्री के पार हो जाता है, तब बाजार में खीरे के दाम भी बढ़ जाते हैं.

सतना. मार्च का महीना किसानों के लिए नई फसलों की शुरुआत का समय माना जाता है. इसी दौरान कई किसान ऐसी फसलों की तलाश में रहते हैं, जो कम समय में तैयार हो जाएं और बाजार में अच्छा दाम भी दिला सकें. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च के महीने में तापमान और नमी का संतुलन खीरे की फसल के लिए बेहद अनुकूल होता है. इस वजह से पौधों की बढ़वार तेजी से होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है. यही कारण है कि सतना सहित आसपास के क्षेत्रों में कई किसान इन दिनों खीरे की खेती की तैयारी में जुट गए हैं और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर कम समय में अधिक मुनाफा कमाने की योजना बना रहे हैं.

खीरे की खेती की सबसे बड़ी खासियत इसका कम समय में तैयार होना है. किसानों के अनुसार, यह फसल केवल 45 से 50 दिनों में बाजार में बेचने के लिए तैयार हो जाती है. यही वजह है कि इसे सबसे तेज उत्पादन देने वाली सब्जियों में गिना जाता है. सतना के किसान अंशुमान सिंह ने लोकल 18 को बताया कि खीरे की खेती कम समय में अच्छी आमदनी देने वाली फसल है. गर्मियों के मौसम में बाजार में खीरे की मांग बढ़ जाती है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलती है. यही कारण है कि कई किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ साथ खीरे की खेती भी करने लगे हैं.

इन किस्मों की ज्यादा मांग
उन्होंने कहा कि खीरे की कुछ खास किस्में बाजार में ज्यादा पसंद की जाती हैं. सतना की मंडियों में मालिनी किस्म का खीरा काफी बिकता है. इसका रंग गाढ़ा हरा होता है और आकार भी आकर्षक होता है, जिससे मंडी में इसका अच्छा दाम मिल जाता है. इसके अलावा पूषा उदय नाम की वैरायटी भी किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है. यह किस्म गर्मी को काफी हद तक सहन कर लेती है, इसलिए गर्मियों में भी इसका उत्पादन अच्छा बना रहता है. विशेषज्ञों का मानना है कि सही किस्म का चयन किसानों की आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

खेती की तैयारी और लागत
खीरे की खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तैयारी करना जरूरी होता है. इसके लिए किसान पहले खेत की गहरी जुताई करवाते हैं और फिर दो से तीन बार रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरी बना देते हैं. इसके बाद खेत में दो से तीन ट्रॉली सड़ी हुई गोबर की खाद डालना फायदेमंद माना जाता है. एक एकड़ में खीरे की खेती के लिए लगभग 600 से 800 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है. एक एकड़ में खीरे की खेती करने में लगभग 50 से 70 हजार रुपये तक का खर्च आता है, जिसमें बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य खर्च शामिल होते हैं.

उत्पादन और मुनाफे की संभावना
उत्पादन की बात करें, तो सतना क्षेत्र में मालिनी किस्म से एक एकड़ में लगभग 150 कुंतल तक उत्पादन मिल सकता है जबकि अन्य हाइब्रिड किस्में जैसे पूषा उदय भी 120 कुंतल से ज्यादा उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं. खीरे की फसल में हर दो से तीन दिन में तुड़ाई करनी पड़ती है, जिससे लगातार बाजार में सप्लाई बनी रहती है. गर्मियों में जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचता है, तब बाजार में खीरे की कीमतें भी बढ़ जाती हैं. ऐसे में किसानों को अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना रहती है. इसके साथ ही मल्चिंग पेपर का उपयोग करने से खेत में नमी बनी रहती है और पौधों की बढ़वार भी अच्छी होती है. यही वजह है कि विशेषज्ञ किसानों को आधुनिक तकनीकों के साथ खीरे की खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं ताकि कम लागत में ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफा हासिल किया जा सके.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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