50000 लोन ने बदल दी ममता की जिंदगी…पुरुषों के इस धंधे में मचाया धमाल!

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Success Story: सीतामढ़ी की ममता देवी ने बैरगनिया में ‘ममता कुमारी ऑटो एक्सेसरीज’ से परिवार की माली हालत सुधार ली है. जीविका समूह से जुड़कर 50000 लोन लेकर उन्होंने खुद की दुकान खोली थी.आज वह महीने में लगभग अब 50-60 हजार की कमाई कर लेती हैं.

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​​सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिले के बैरगनिया की रहने वाली ममता देवी आज उन महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं, जो मुश्किल परिस्थितियों में हार मान लेती हैं. बैरगनिया के हॉस्पिटल चौक पर किराए की दुकान चलाने वाली ममता ने ‘ममता कुमारी ऑटो एक्सेसरीज’ के माध्यम से न केवल अपने परिवार की माली हालत सुधारी है, बल्कि एक पुरुष प्रधान व्यवसाय (ऑटो स्पेयर पार्ट्स) में अपनी मजबूत पहचान बनाई है. साल 2014 में ‘जीविका’ समूह से जुड़कर शुरू हुआ उनका यह सफर आज 50 से 60 हजार रुपये प्रति माह की कमाई तक पहुंच चुका है. ममता का मानना है कि हिम्मत और सही वित्तीय सहयोग मिले तो कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है.

दुकान के लिए लिया था 50000 लोन

​ममता के संघर्ष की कहानी कोरोना काल की चुनौतियों से जुड़ी है. उनके पति, कैलाश गिरी, ऑटो चलाकर घर का गुजारा करते थे, लेकिन लॉकडाउन के दौरान काम ठप होने से परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ गया. उस संकट की घड़ी में ममता ने घर बैठने के बजाय कुछ नया करने की ठानी. एक मिस्त्री की सलाह पर उन्होंने टेंपो स्पेयर पार्ट्स की दुकान खोलने का विचार किया. हालांकि इसके लिए 4 से 5 लाख रुपये की बड़ी पूंजी की जरूरत थी. उन्होंने अपनी सूझबूझ से जीविका से मिले 50 हजार रुपये और विभिन्न बैंकों (बड़ौदा बैंक, HDFC, अन्नपूर्णा) तथा ग्रामीण ऋणों के माध्यम से पूंजी जुटाई और साल 2022 में अपनी दुकान की नींव रखी.

1 मजदूर को दिया है रोजगार

आज ममता की दुकान में करीब 5 से 8 लाख रुपये का स्टॉक रहता है. वह खुद दुकान का सारा कामकाज संभालती हैं और टेंपो के स्पेयर पार्ट्स की बारीकियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं. उनके इस बढ़ते कारोबार ने न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उन्होंने एक मजदूर को रोजगार भी दिया है. उनकी आर्थिक स्थिति में इतना सुधार हुआ है कि उन्होंने न केवल पुराने कर्ज चुकाए. बल्कि अब वे अपनी बेटी को इंटर (12वीं) की शिक्षा दिला रही हैं. ममता कहती हैं कि अगर सरकार से और सहयोग मिले तो वे अपने काम को और बड़े स्तर पर ले जाना चाहती हैं. ताकि अधिक लोगों को रोजगार मिल सके.

​ममता देवी की यह सफलता ‘महिला सशक्तिकरण’ का जीता-जागता उदाहरण है. जहां एक तरफ उनके पति सड़क पर ऑटो चलाकर परिवार की मदद कर रहे हैं. वहीं, ममता दुकान संभालकर आर्थिक मोर्चे पर ढाल बनी हुई हैं. सीतामढ़ी के बैरगनिया जैसे छोटे क्षेत्र से निकलकर एक महिला का स्पेयर पार्ट्स जैसे तकनीकी क्षेत्र में सफल होना समाज की सोच बदलने वाला है. जीविका जैसी योजनाओं और दृढ़ संकल्प के मेल ने ममता को एक साधारण गृहणी से एक सफल उद्यमी बना दिया है, जो अब अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वावलंबी बनने की प्रेरणा दे रही हैं.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें

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