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Success Story: डिजिटल इंडिया के दौर में गुमला के एक युवा ने मोबाइल को स्वरोजगार का जरिया बनाया है. जयपाल कुजूर ने यूट्यूब से आइडिया लेकर 80 हजार की लागत से एक आधुनिक गन्ना जूस स्टॉल शुरू किया है. अपनी 15 एकड़ की खेती और इस अनोखी मशीन के दम पर वह रोजाना 400 गिलास से अधिक जूस बेच रहे हैं.
गुमला: आज के आधुनिक युग में मोबाइल और इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि करियर बदलने वाला लाइफ चेंजर भी साबित हो रहे हैं. झारखंड के गुमला जिले के एक युवा ने इस बात को सच कर दिखाया है. जयपाल कुजूर नामक इस युवक ने यूट्यूब पर एक वीडियो देखा. जिससे उन्हें बिजनेस का ऐसा अनूठा आइडिया मिला कि आज वह गुमला की सड़कों पर आकर्षण का केंद्र बन गए हैं.
यूट्यूब से मिला चलता-फिरता आइडिया
गुमला के भरनो प्रखंड के कुसुंबाहा गांव के रहने वाले जयपाल कुजूर पिछले तीन साल से गन्ने का जूस बेचने का काम कर रहे थे. पहले वह पारंपरिक तरीके से जूस निकालते थे. लेकिन वह कुछ अलग करना चाहते थे. जयपाल ने Local 18 को बताया कि मैं पढ़ाई के साथ-साथ यह काम करता हूं. एक दिन यूट्यूब देखते समय मुझे पटना की एक विशेष डिजाइन वाली असेम्बल गाड़ी दिखी. मुझे लगा कि अगर मैं इस तकनीक को गुमला लाऊं, तो मेरा काम आसान और आकर्षक हो जाएगा.
₹80 हजार का निवेश और पटना से मंगाई मशीन
जयपाल ने हिम्मत जुटाकर लगभग 80 हजार रुपये की लागत से एक विशेष तीन चक्का गाड़ी (असेम्बल ठेला) का ऑर्डर पटना में दिया. यह गाड़ी पूरी तरह से सुसज्जित है. इसमें गन्ने का जूस निकालने का आधुनिक सेटअप लगा है. इस निवेश ने उनके पारंपरिक काम को एक प्रोफेशनल लुक दे दिया. अब जयपाल गुमला शहर के जशपुर रोड डेली मार्केट के समीप अपनी इस चलती-फिरती दुकान को लगाते हैं. जो दूर से ही ग्राहकों को अपनी ओर खींच लेती है.
रोजाना 400 गिलास की बिक्री और शुद्धता का वादा
जयपाल की सफलता का राज केवल उनकी आधुनिक गाड़ी नहीं, बल्कि जूस की गुणवत्ता भी है. वह बताते हैं कि वे किसी और से गन्ना नहीं खरीदते. बल्कि अपने ही गांव में करीब 15 एकड़ जमीन पर गन्ने की उन्नत खेती करते हैं. अपने ही खेत का ताजा गन्ना होने के कारण जूस का स्वाद लाजवाब होता है. ग्राहकों को लुभाने के लिए वह गन्ने के जूस में ताजा पुदीना, नींबू और काला नमक मिलाकर परोसते हैं.
आर्थिक मजबूती और युवाओं के लिए मिसाल
कीमत की बात करें तो जयपाल महज 20 रुपये प्रति गिलास में यह ताजगी भरा पेय बेचते हैं. गर्मी के मौसम में उनकी लोकप्रियता इतनी है कि सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक वे रोजाना 400 गिलास से अधिक जूस बेच लेते हैं. एक समय जो काम सिर्फ जीविकोपार्जन का जरिया था. आज वह एक सफल स्टार्टअप जैसा दिख रहा है. जयपाल की यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि अगर सही सोच और तकनीक का मेल हो, तो छोटे शहर में भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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