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Success Story : एयरबिएनबी (Airbnb) की सफलता सिखाती है कि कोई भी बिजनेस छोटा नहीं होता. जो सफर किराया चुकाने की मजबूरी से शुरू हुआ था, उसने आज दुनिया के रहने और घूमने के तरीके को बदल दिया है. 220 देशों में काम कर रही इस कंपनी ने कैसे सफलता पाई और क्या-क्या परेशानी झेली, आइये जानते हैं…
साल 2007 में सैन फ्रांसिस्को से एयरबिएनबी की शुुरआत हुई.
नई दिल्ली. जब आप अपनी घड़ी की एक टिक सुनते हैं तो उस एक सेकंड के भीतर दुनिया के किसी न किसी कोने में 5 से 6 लोग एयरबिएनबी (Airbnb) के किसी अपार्टमेंट या विला में चेक-इन कर रहे होते हैं. हर दिन 20 लाख से ज्यादा लोग इस प्लेटफॉर्म के जरिए अपना ठिकाना ढूंढते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि 220 देशो में काम कर रही यह कंपनी किसी आलीशान ऑफिस से नहीं, बल्कि एक छोटे से कमरे में मजबूरी और तंगी के बीच पैदा हुई थी. यह कहानी है उन दो रूममेट्स की, जिनके पास घर का किराया देने के पैसे नहीं थे, लेकिन आज वे दुनिया के सबसे सफल स्टार्टअप्स में से एक के मालिक हैं. $1,000 की पहली कमाई से 7.85 लाख करोड़ रुपये की मार्केट कैप तक पहुंचने एयरबिएनबी का यह सफर काफी रोमांचकर और संघर्षपूर्ण रहा है.
साल 2007 में सैन फ्रांसिस्को में दो दोस्त, ब्रायन चेस्की (Brian Chesky) और जो गेबिया (Joe Gebbia) एक डिजाइन कंसल्टेंसी कंपनी चलाने के लिए हाथ-पैर मार रहे थे. वे एक किराए के फ्लैट में रहते थे और हालात इतने विकट हो चुके थे कि उनके पास किराया चुकाने के पैसे नहीं थे. उसी दौरान शहर में एक बड़ा आयोजन हुआ. सभी होटल हाउसफुल हो गए. दोनों दोस्तों को एक मौका दिखा. उन्होंने सोचा कि क्यों न अपने लिविंग रूम में हवा से भरे गद्दे (Air Mattresses) बिछाकर लोगों को ठहराया जाए और साथ में नाश्ता (Breakfast) भी दिया जाए. उन्होंने तीन एयर मैट्रेस खरीदे और एक साधारण सी वेबसाइट बनाई AirBedAndBreakfast.com.
1000 डॉलर हुई पहली कमाई
शुरुआत में उनके पास तीन मेहमान आए. हर रात के लिए उन्होंने 80 डॉलर चार्ज किए और उस एक वीकेंड में उन्होंने $1,000 कमाए. इस साधारण से प्रयोग ने एक नए कॉन्सेप्ट को जन्म दिया जिसे आज हम ‘होम शेयरिंग’ कहते हैं. 2008 में नाथन ब्लेचार्ज़िक भी चेस्की और गेबिया के साथ हो लिए. उन्होंने वेबसाइट और कंपनी के नाम को छोटा कर एयरबीएनबी किया और वेबसाइट के तकनीकी पक्ष को संभाला. अब यह सिर्फ गद्दों तक सीमित नहीं था, बल्कि लोग अपने पूरे घर, ट्रीहाउस या अपार्टमेंट को लिस्ट करने लगे थे.
बेचने पड़े अनाज के डिब्बे
सफलता की राह इतनी आसान नहीं थी. 2008 की वैश्विक मंदी के दौरान कंपनी कंगाली के कगार पर आ गई थी. 50 से ज्यादा निवेशकों ने उन्हें फंड देने से मना कर दिया था. फाउंडर्स के क्रेडिट कार्ड्स पर 30,000 डॉलर का कर्ज हो गया था. अपनी कंपनी को बचाने के लिए फाउंडर्स ने एक अनोखा तरीका अपनाया. उस समय अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव चल रहे थे. उन्होंने ‘ओबामा ओज’ (Obama O’s) और ‘कैप्टन मैक्केन’ नाम से सेरेल्स (अनाज) के डिब्बे डिजाइन किए. उन्होंने 40 डॉलर प्रति डिब्बे के हिसाब से अनाज बेचा और यादगार के तौर पर लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया. इस ‘अनाज मार्केटिंग’ से उन्होंने 30,000 डॉलर कमाए और अपना कर्ज उतारकर कंपनी को डूबने से बचाया. यही वह जिद थी जिसने बाद में ‘Y Combinator’ जैसे बड़े निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा.
ऐसा नहीं है कि इसके बाद भी कंपनी न परेशानी न झेली हो. 2009 में न्यूयॉर्क में एक होस्ट का घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे कंपनी की छवि पर दाग लगा. चेस्की ने इसे अपना ‘क्राइसिस मोमेंट’ माना और तुरंत 1 मिलियन डॉलर का गारंटी फंड और इंश्योरेंस पॉलिसी शुरू की. न्यूयॉर्क, बर्लिन और लंदन जैसे बड़े शहरों में होटलों की लॉबिंग और कानूनी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा. फाउंडर्स को जेल तक की धमकियां मिलीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने सरकारों के साथ मिलकर टैक्स कलेक्शन के नियम बनाए और अपनी पारदर्शिता साबित की.
कोरोना काल में भी लगा झटका
साल 2020 में जब पूरी दुनिया ठहर गई, तो Airbnb के लिए यह सबसे बड़ा झटका था. ट्रेवल बैन की वजह से 80% बुकिंग्स कैंसिल हो गईं और कंपनी को 3.9 अरब डॉलर का नुकसान हुआ. स्टॉक 50% तक गिर गया. लेकिन जैसे ही दुनिया खुली, लोगों ने होटलों के बजाय ‘होमस्टे’ को ज्यादा सुरक्षित माना. 2021 के बाद से कंपनी ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि आज यह पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुकी है.
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