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Traditional Water Filtration Tricks: अगर आपके घर में वॉटर प्यूरिफायर नहीं है, तो कुछ नेचुरल तरीकों से पानी को पीने लायक बना सकते हैं. पानी को उबालने से इसमें मौजूद बैक्टीरिया, वायरल और पैरासाइट खत्म हो जाते हैं. इसके अलावा फिटकरी, क्लोरीन, ब्लीच और आयोडीन से भी पानी को कुछ हद तक साफ किया जा सकता है.
पानी को शुद्ध करने के लिए उसे 15-20 मिनट तक उबाल सकते हैं.
Simple Hacks To Purify Water: आजकल पानी को साफ करने के लिए बाजार में कई तरह के वॉटर प्यूरीफायर उपलब्ध हैं. अधिकतर कंपनियां दावा करती हैं कि उनके प्यूरिफायर से पानी के 99.99% इम्प्योरिटी दूर हो जाती हैं और पानी एकदम साफ हो जाता है. कई प्यूरिफायर की कीमत ज्यादा होती है और उन्हें मेंटेन करने के लिए भी खर्च करना पड़ता है. ऐसे में कई लोग प्यूरिफायर अफॉर्ड नहीं कर पाते हैं और कुछ जगहों पर बिजली की किल्लत होती है. अगर आपके घर में RO नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. आप कुछ आसान और वैज्ञानिक तरीकों से पानी को पीने लायक बना सकते हैं. शुद्ध पानी केवल प्यास ही नहीं बुझाता, बल्कि शरीर को टाइफाइड और पेचिश जैसी जानलेवा बीमारियों से भी बचाता है.
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और सीनियर फिजीशियन डॉ. अनिल बंसल ने News18 को बताया कि पानी को शुद्ध करने का सबसे पुराना और कारगर तरीका उबालना है. जब पानी को हाई टेंपरेचर पर कम से कम 20 मिनट तक उबाला जाता है, तो इसमें मौजूद सभी बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट खत्म हो जाते हैं. यह विधि घर पर उपयोग के लिए सबसे आसान है. ध्यान रहे कि उबालने के बाद पानी को ठंडा होने दें और किसी साफ बर्तन में ढककर रखें, ताकि बाहरी धूल-मिट्टी दोबारा उसे गंदा न कर सके. उबालने के बाद पानी काफी हद तक साफ हो जाता है और इसे पीना सेफ माना जाता है.
डॉक्टर ने बताया कि शहरी क्षेत्रों या इमरजेंसी कंडीशन में पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन या ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग किया जा सकता है. अगर पानी में गंदगी है, तो उसे पहले जमने दें और फिर पानी में 8.25% सोडियम हाइपोक्लोराइट वाला ब्लीच मिलाएं. आमतौर पर 4 लीटर पानी में करीब 6-7 6 बूंदें पर्याप्त होती हैं. इसे मिलाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दें. इसकी वजह से पानी में हल्की गंध आ सकती है या स्वाद बदल सकता है. हालांकि यह हानिकारक कीटाणुओं को मारने में बेहद प्रभावी है. इस प्रक्रिया के जरिए भी आप घर पर पानी को पीने लायक बना सकते हैं.
एक्सपर्ट ने बताया कि आसवन या डिस्टिलेशन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें पानी को उबाला जाता है और उससे निकलने वाली भाप को एक कंडेंसर के जरिए दोबारा पानी के रूप में इकट्ठा किया जाता है. यह विधि पानी से कीटाणुओं के साथ-साथ भारी धातुओं और घुले हुए लवणों को भी अलग कर देती है. हालांकि यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल और समय लेने वाली है, लेकिन इससे प्राप्त पानी डिस्टिल्ड वॉटर की तरह पूरी तरह शुद्ध होता है. इसके अलावा पानी में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस को मारने के लिए आयोडीन एक शक्तिशाली रासायनिक कीटाणुनाशक है. यह सामान्य फिल्ट्रेशन से अधिक कुशल माना जाता है. यह उन स्थितियों में बहुत काम आता है, जहां पानी उबालने की सुविधा न हो. हालांकि आयोडीन युक्त पानी का स्वाद थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए इसे केवल इमरजेंसी कंडीशन में ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए.
डॉक्टर बंसल की मानें तो सूर्य की रोशनी में मौजूद अल्ट्रा वॉयलेट किरणें (UV Rays) प्राकृतिक रूप से सूक्ष्मजीवों के डीएनए को नष्ट कर देती हैं, जिससे वे मर जाते हैं. इस प्रक्रिया को सोलर प्यूरीफिकेशन कहा जाता है. इसमें आप साफ प्लास्टिक की बोतलों में पानी भरकर उसे कई घंटों तक सीधी धूप में रख सकते हैं. आधुनिक UV प्यूरीफायर भी इसी सिद्धांत पर काम करते हैं और 99.99% कीटाणुओं को मार देते हैं. हालांकि यह तरीका धूल या भारी धातुओं को बाहर नहीं निकाल पाता, इसलिए इसके साथ सूती कपड़े से छानने की प्रक्रिया भी अपनानी चाहिए.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें