Benefits of Ashwagandha: गोरखपुर में स्ट्रोक के बढ़ते मामलों के बीच आयुर्वेदिक औषधि अश्वगंधा को सहायक उपचार के रूप में उपयोगी माना जा रहा है. गोरखपुर यूनिवर्सिटी के बॉटनी विभाग के प्रोफेसर अभय के अनुसार स्ट्रोक दो प्रकार का होता है. हेमरेजिक और इस्केमिक. हेमरेजिक स्ट्रोक में दिमाग की नस फटने से ब्लीडिंग होती है, जबकि इस्केमिक स्ट्रोक में खून का थक्का जमने से रक्त संचार रुक जाता है. दोनों ही स्थितियों में दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और मरीज लकवे का शिकार हो सकता है. प्रोफेसर के मुताबिक नियंत्रित मात्रा में और डॉक्टर की सलाह से अश्वगंधा का सेवन न्यूरॉन्स के पुनर्निर्माण में मदद कर सकता है. इससे दिमाग की कोशिकाएं मजबूत होती है और रिकवरी में सहारा मिल सकता है. हालांकि स्ट्रोक का इलाज डॉक्टर की निगरानी में ही जरूरी है.