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- Lesson Of Mahabharata And Ramayana, Story Of Dropadi, Ramayanaya Life Management Tips, International Women’s Day 2026
4 घंटे पहले
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आज (8 मार्च) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। इस अवसर पर जानिए रामायण-महाभारत की 8 खास महिलाओं के बारे में, जिनसे हम सुखी जीवन के सूत्र सीख सकते हैं। इस ग्रंथ में बताया गया है कि महिलाओं का अपमान करने वाला व्यक्ति कितना भी ताकतवर हो, वह बर्बाद हो जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः, यानी जिन घरों में महिलाओं का सम्मान होता है, वहां सभी देवी-देवताओं का वास होता है। जानिए ग्रंथों की 8 खास महिलाओं से बारे में और उनसे हम कौन सी बात सीख सकते हैं…
अनसूइया: सतीत्व से महिला की होती है पूजा
रामायण में राम, सीता और लक्ष्मण का वनवास काल चल रहा था, इस दौरान एक दिन वे अत्रि मुनि के आश्रम पहुंचे। आश्रम में अत्रि मुनि की पत्नी अनसूइया ने सीता को स्त्री धर्म समझाया। अनसूइया को उनके सतीत्व की वजह से पूजनीय माना गया है। अनसूइया ने संदेश दिया है कि स्त्री अपने सतीत्व की शक्ति से पूजनीय बन सकती है।
सीता: मुश्किल समय में भी पति का साथ न छोड़ें
रामायण में कैकयी ने राजा दशरथ से दो वर मांगे थे- पहला भरत को राज और राम को 14 वर्ष का वनवास। वनवास सिर्फ राम को जाना था, लेकिन अपने पतिव्रत धर्म को निभाने के लिए देवी सीता ने भी वनवास जाने की इच्छा बताई। राम और कौशल्या ने सीता को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन सीता अपने पति का साथ देने की बात पर टिकी रहीं। देवी सीता ने संदेश दिया है कि मुश्किल समय में भी जीवन साथी का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
उर्मिला: पति के सही निर्णय में साथ देना चाहिए
उर्मिला सीता की बहन थीं और उनका विवाह लक्ष्मण के साथ हुआ था। श्रीराम और सीता के साथ लक्ष्मण ने भी वनवास जाने का निर्णय लिया था। उर्मिला ने अपने पति लक्ष्मण की इच्छा मान रखा और स्वयं पति के बिना 14 वर्षों तक राजमहल में पति के बिना नियम-संयम के साथ रहीं। इसी त्याग की वजह से उर्मिला को पूजनीय माना गया है। उर्मिला ने संदेश दिया है कि जीवन साथी की इच्छा का मान रखना चाहिए और उसके सही निर्णय में उसका साथ देना चाहिए।
मंदोदरी: जीवन साथी की गलतियों पर उसे समझाएं
मंदोदरी रावण की पत्नी थीं। मंदोदरी हमेशा रावण की भलाई चाहती थीं। इसलिए सीता हरण के बाद मंदोदरी ने रावण को समझाने की बहुत कोशिश की। उसने कई बार रावण से कहा कि वह सीता को लौटा दें, लेकिन अहंकार की वजह से रावण ने मंदोदरी की बातें नहीं मानी और उसका अंत हो गया। मंदोदरी और रावण के जीवन से सीख लेनी चाहिए कि जीवन साथी की सही सलाह तुरंत मान लेनी चाहिए, वर्ना सबकुछ खत्म हो सकता है। जीवन साथी अगर कोई गलती करता है, तो उस समझाने की कोशिश करनी चाहिए और उसे बुराइयों से दूर करना चाहिए।
शूर्पणखा: गलत संबंध बनाने से बचें
पंचवटी में शूर्पणखा ने राम और लक्ष्मण को देखा और उनकी सुंदरता से मोहित हो गई। उसने बारी-बारी से राम और लक्ष्मण से विवाह करने की बात कही। जब राम और लक्ष्मण ने उसे मना कर दिया, तो क्रोधित शूर्पणखा ने सीता को मारने के लिए दौड़ लगाई। उस समय लक्ष्मण ने उसे रोकते हुए उसका नाक और कान काट दिए। इस घटना से हमें यह सीख मिलती है कि दूसरों के रिश्तों और भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। किसी से गलत या अनैतिक रिश्ता बनाने का प्रयास नहीं करना चाहिए, वर्ना घर-परिवार और समाज में अपमानित होना पड़ सकता है।
द्रौपदी: हर स्थिति में महिलाओं का सम्मान करें
महाभारत के महत्वपूर्ण पात्रों में से एक थीं द्रौपदी। दुर्योधन के कहने पर हस्तिनापुर के भरे दरबार में दु:शासन ने द्रौपदी का चीर हरण किया। इसी अपमान की वजह से कौरव-पांडव के बीच युद्ध हुआ। दुर्योधन-दु:शासन की गलती की सजा पूरे कौरव वंश को मिली। महाभारत का संदेश यह है कि महिलाओं का हर स्थिति में सम्मान करना चाहिए। महिलाओं का अपमान करने वाले लोग बर्बाद हो जाते हैं।
कुंती: संतान को अच्छे संस्कार दें
महाभारत में महाराज पांडु की मृत्यु के बाद कुंती ने अभावों में रहते हुए भी पांचों पांडव पुत्रों को अच्छे संस्कार दिए। धर्म-अधर्म का ज्ञान दिया। कुंती के संस्कारों की वजह से ही सभी पांडव हमेशा धर्म के मार्ग पर चले। श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त की। जो लोग धर्म के अनुसार काम करते हैं, उन्हें ईश्वर की कृपा जरूर मिलती है। माता के अच्छे संस्कार ही संतान का जीवन सफल बनाते हैं।
गांधारी: संतान की गलतियां नजरअंदाज न करें
धृतराष्ट्र की पत्नी और दुर्योधन की माता गांधारी ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी। दृष्टिहीन धृतराष्ट्र और गांधारी की आंखों पर बंधी पट्टी इस बात का प्रतीक है कि जब माता-पिता अपनी संतान के बुरे कर्मों पर ध्यान नहीं देते हैं, तब सबकुछ बर्बाद हो जाता है। इन दोनों को अपने पुत्र दुर्योधन के गलत काम दिखाई ही नहीं दिए, दुर्योधन की हर गलती को नजरअंदाज किया। जो माता-पिता संतान मोह में आंखों पर पट्टी बांध लेते हैं, बच्चों को अच्छे संस्कार नहीं देती है, उनकी संतान गलत रास्ते पर चली जाती है।
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