Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: आज भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी है. ये संकट, दुख और बाधाओं से मुक्ति पाने वाला व्रत माना जाता है. स्कन्द पुराण के अनुसार जो व्यक्ति इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करता है, उसके जीवन के बड़े से बड़े कष्ट भी दूर हो जाते हैं. ये व्रत चंद्रमा की पूजा के बाद पूरा होता है. चैत्र माह की संकष्टी चतुर्थी पर आपके शहर में चांद कब निकलेगा यहां जान लें.
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2026 आपके शहर में चंद्रोदय समय
| दिल्ली | रात 9 बजकर 14 मिनट |
| नोएडा | रात 9 बजकर 13 मिनट |
| लखनऊ | रात 8 बजकर 56 मिनट |
| पटना | रात 8 बजकर 37 मिनट |
| मुंबई | रात 9 बजकर 21 मिनट |
| भोपाल | रात 9 बजकर 07 मिनट |
| हैदराबाद | रात 8 बजकर 56 मिनट |
| आगरा | रात 09 बजकर 09 मिनट |
| इंदौर | रात 9 बजकर 13 मिनट |
| अहमदाबाद |
रात 9 बजकर 26 मिनट |
| जयपुर | रात 9 बजकर 18 मिनट |
| गोरखपुर | रात 8 बजकर 46 मिनट |
| चंडीगढ़ | रात 9 बजकर 18 मिनट |
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
- सन्ध्याकाल में पुनः स्नान करके पवित्र वेदी की रचना कर स्वर्ण आदि से निर्मित गणपति जी की प्रतिमा विराजमान करें.
- भगवान गणेश जी का ध्यान एवं आवाहन करें.
- विधि-विधान से षोडशोपचार गणेश पूजन करें.
- संकष्टी के अवसर पर भगवान गजानन गणपति को उनकी प्रिय मोदक, सुपारी, मूंग तथा दूर्वा अवश्य अर्पित करें.
- गणेश जी की पूजा सम्पन्न होने के पश्चात् चन्द्रोदय के समय, गन्ध, पुष्प आदि से चन्द्रदेव का पूजन करें तथा उन्हें अर्घ्य एवं नैवेद्य आदि अर्पित करें.
- पूजन सम्पन्न होने पर ब्राह्मण-भोज का आयोजन करें. अन्त में व्रत का पारण करते हुये स्वयं भोजन ग्रहण करें. इस व्रत में तैल युक्त भोजन ग्रहण करना निषेध होता है.
Sankashti Chaturthi 2026 Vrat Katha: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी आज, इस कथा के बिना अधूरा है पूजा-व्रत
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