डिंडौरी जिले के ग्यारह महिला और पुरुष मजदूर मंगलवार को हैदराबाद से वापस लौटे, लेकिन मजदूरी न मिलने के कारण उन्हें मदद के लिए सीधे थाने जाना पड़ा। मजदूरों ने डिंडोरी थाने में शिकायत दर्ज कराई कि तीन महीने काम करने के बाद भी उन्हें तय मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है। पुलिस के हस्तक्षेप और ठेकेदार से सीधी बात होने के बाद ही मजदूरों को उनकी मेहनत की कमाई मिलने का आश्वासन मिला, जिसके बाद वे अपने घरों की ओर रवाना हुए। एजेंटों के माध्यम से हैदराबाद गए थे मजदूरों ने बताया कि वे दिसंबर माह में स्थानीय एजेंट लक्ष्मण ठाकुर और सुशील के माध्यम से हैदराबाद गए थे, जहां उन्हें रेल लाइन के काम में लगाया गया था। वहां वे तेलंगाना के ठेकेदार कुमार बांड के अधीन कार्य कर रहे थे। काम के बदले महिलाओं को 400 रुपए और पुरुषों को 450 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी तय की गई थी। होली के त्योहार पर घर लौटने के लिए जब उन्होंने हिसाब किया, तो कुल 1 लाख 60 हजार रुपए का भुगतान बकाया निकला। ठेकेदार ने उन्हें डिंडौरी पहुंचने पर पैसे देने का भरोसा दिया था, लेकिन यहां पहुंचते ही एजेंट उन्हें बीच रास्ते में छोड़कर भाग गया। पुलिस की सख्ती के बाद ठेकेदार ने दिया आश्वासन मजदूरों की परेशानी देख सब इंस्पेक्टर भिपेंद्र पाठक ने तुरंत तेलंगाना के ठेकेदार से फोन पर चर्चा की। पुलिस की सख्ती के बाद ठेकेदार ने जानकारी दी कि उसने मजदूरों के एक साथी के खाते में 50 हजार रुपए भेज दिए हैं और शेष राशि का भुगतान भी जल्द ही कर दिया जाएगा। .